बीजापुर इलाके में सुरक्षा बलों का पूरा फोकस अब नक्सल कमांडर पापा राव को तलाशने पर है। उसे जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए बड़ा अभियान छेड़ा गया है। पिछले एक साल में सीपीआई (माओवादी) से जुड़े 11 सीसी मेंबर और पोलित सदस्य या तो मुठभेड़ में मारे गए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इससे नक्सल संगठन की कमर बुरी तरह टूट गई है। बस्तर में लाल आतंक की कमान पहले हिड़मा जैसे बड़े नक्सली नेताओं के हाथों में थी, लेकिन हिड़मा को आंध्रप्रदेश की एक मुठभेड़ में जवानों ने ढेर कर दिया था। यह नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका था। इसी तरह बारसे देवा ने हैदराबाद में आत्मसमर्पण कर नक्सल आंदोलन को और कमजोर कर दिया है। बस्तर में सक्रिय बड़े नक्सल नेताओं में अब सिर्फ पापा राव ही रह गया है। बीते साल बस्तर में नक्सल नेटवर्क को जबरदस्त चोट पहुंची। सुरक्षा बलों की इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई और तगड़े समन्वित ऑपरेशन के कारण नक्सलियों की सप्लाई लाइन टूट चुकी है। इसके बावजूद पापा राव जैसा कुख्यात नक्सली अब भी जंगलों में सक्रिय है। उसका खात्मा अब नक्सल विरोधी अभियान का मुख्य लक्ष्य बन गया है। पापा राव की तलाश न सिर्फ एक रणनीतिक मिशन है, बल्कि नक्सल नेतृत्व को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में अंतिम कड़ी भी मानी जा रही है। जानिए, कौन है पापा राव?
पापा राव को वेस्ट बस्तर एरिया कमेटी के कमांडर के तौर पर जाना जाता है। बीजापुर इलाके में वह दशकों से सक्रिय रहा है। 6 जनवरी 2025 को इसी कमेटी द्वारा किए गए कुटरू-बेदरे रोड आईईडी ब्लास्ट में 8 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे और एक ड्राइवर की भी मौत हुई थी। इस हमले का नेतृत्व भी पापा राव ने ही किया था। उसकी पहचान खूंखार नक्सली कमांडर के तौर पर है। पुलिस के अनुसार, पापा राव पर करीब 25 लाख रुपए का इनाम घोषित है। मिशन 2026 की नींव बना 2025 ऐसे टूटी नक्सल संगठन की कमर
नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में 2025 निर्णायक साल के रूप में दर्ज हुआ। यह पहला साल रहा, जब नक्सली एक भी हथियार लूटने में पूरी तरह नाकाम रहे। इसके उलट सुरक्षा बलों ने रिकॉर्ड हथियार, आईईडी और कैडर को या तो खत्म किया या मुख्यधारा में लौटने पर मजबूर कर दिया। यही वजह रही कि साल 2025 को अब मिशन 2026 का मजबूत आधार माना जा रहा है। ऑपरेशन कम, असर ज्यादा
2025 में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ों की संख्या 99 रही, जो 2024 से कम थी, लेकिन इन्हीं ऑपरेशनों में 256 नक्सली मारे गए। यह पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा है। इससे साफ हुआ कि सुरक्षा बलों ने बड़े इलाके की अंधाधुंध कॉम्बिंग छोड़कर इंटेलिजेंस आधारित, सटीक और टारगेटेड कार्रवाई पर फोकस किया। रणनीति बदली, तो नतीजे भी कई गुना बेहतर आए। सप्लाई लाइन पर सीधा वार
बस्तर में लगातार दूसरे साल भारी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं। 2025 में 884 नक्सली पकड़े गए। यह आंकड़ा बताता है कि अब सिर्फ जंगल नहीं, बल्कि नक्सलियों की सप्लाई लाइन, शहरी नेटवर्क और मुखबिर तंत्र भी सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर है। नक्सल संगठन की आंतरिक संरचना बुरी तरह चरमराई है। इसी वजह से बड़ी संख्या में सरेंडर भी हो रहे हैं।


