बांसवाड़ा जिला प्रमुख ने शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए हर तरह से प्रयास किए जाएंगे। जिला प्रमुख रेशम मालवीया ने बैठक में कहा- विभाग में जिस चीज की कमी हो उसका प्रप्रोजल प्रस्तुत करें। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर मांग रखेंगे। उन्होंने सभी बीसीएमओ को कहा कि ब्लॉक स्तरीय मॉर्च्युरी खुलवाने के प्रयास करें। स्थानीय विधायक को इसके लिए प्रप्रोजल प्रस्तुत करें। इसमें किसी को भी कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य योजना, मां वाउचर योजना, परिवार कल्याण, एनसीडी, निशुल्क दवा वितरण, सिकल सेल, टीबी, शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। साथ ही कुछ हिदायतें भी दी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एचएल ताबियार ने जिले के उन 11 सब सेंटर की जानकारी दी, जहां भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस पर बीसीएमओ ने विशेषकर अतिक्रमण, दलदल जमीन, गांव से दूर होने की समस्या बताई। इस पर जिला प्रमुख ने उचित समाधान के लिए एसडीएम और जिला कलक्टर से बातचीत करने के निर्देश दिए। जिले में औसतन हर माह 4 हजार प्रसव जिला प्रमुख ने जिले में हो रहे प्रसव को लेकर विशेष बातचीत की। इस पर सीएमएचओ डॉ एचएल ताबियार ने कहा कि जिले में हर माह 4000 औसतन प्रसव हो रहे हैं। जिसमें से कई संस्थान तो ऐसे हैं जो स्वयं ही हर माह 200-200 औसत प्रसव करवा रहे हैं। इस पर जिला प्रमुख ने खुशी व्यक्त की और कहा कि स्वास्थ्य विभाग बहुत अच्छा काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले बांसवाड़ा स्वास्थ्य मुद्दों को लेकर अंतिम पायदान पर रहता था, लेकिन अब यहां स्थितियां बदल चुकी हैं। हमारे अधिकांश चिकित्सक स्थानीय क्षेत्र के हैं। इसका फायदा आम जनता को मिल रहा है। जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में अस्पतालों का झाल बिछ रहा है। जल्द ही खाली पद भी भरवाने और एक्सरे जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देंगे। मरीजों की जांच के लिए चिकित्सक समय दें, झोलाछाप भाग जाएंगे जिला प्रमुख रेशम मालवीया ने कहा- हमारे यहां स्वास्थ्य सुविधाओं में निःसंदेह विस्तार हुआ है। लेकिन, चिकित्सकों के व्यवहार को लेकर शिकायतें मिलती हैं। चिकित्सक स्थानीय भाषा में बात करें और मरीज को समय दें। वह स्वयं अपने अस्पताल को एक ब्रांड के रूप में प्रस्तुत करें। इससे लोग झोलाछाप के पास भी जाना बंद कर देंगे। वे अपने आप ही भाग जाएंगे। लेकिन इसके लिए हमें आमजन को हाई क्वालिटी की सुविधाएं देनी होंगी। मरीज को समय देना होगा। कभी कभार चिकित्सक नहीं मिलते हैं तो नर्सिंग स्टाफ मरीजों को बैठाकर रखता है। यह भी गलत है। मरीज को अस्पताल में आते ही इलाज मिलना चाहिए। हालांकि उन्होंने अस्पतालों में साफ-सफाई में विशेषकर शौचालय की स्थिति को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की। लोधा में पीएचसी का सुझाव अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ भरतराम मीणा ने बताया- लोधा या डांगपाड़ा क्षेत्र में एक प्राथमिक स्वास्थ्य होना चाहिए। क्योंकि यहां पर मिल वर्कर अधिकांश संख्या में निवास करते हैं। ऐसे में यदि एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुल जाए तो हजारों लोगों को राहत मिलेगी। इस पर जिला प्रमुख ने विधायक के माध्यम से प्रस्ताव रखने के निर्देश दिए। अस्पताल को आकर्षक बनाया जाए जिला प्रमुख ने कहा- अस्पताल दिखने में भी आकर्षक होना चाहिए। उन्होंने आनंदपुरी और सल्लोपाट की तारीफ भी की। कहा कि बजट का सदुपयोग किया जाए। अस्पतालों में रंगरोगन, वृक्षारोपण कर आकर्षक बनाया जाए। साथ ही रिकॉर्ड को मेंटेन रखें। ताकी कोई भी अधिकारी बाहर से आए तो वह बांसवाड़ा की प्रशंसा अन्य जिलों में भी जाकर करे। इस दौरान सभी बीसीएमओ को अपने अधीन आने वाले अस्पतालों में अधिक से अधिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। बैठक में यह रहे मौजूद आरसीएचओ डॉ दिनेश कुमार भाबोर, डीपीसी डॉ प्रवीण गुप्ता, बीसीएमओ के रूप में डॉ मुकेश मईड़ा, डॉ भगत सिंह तंबोलिया, डॉ प्रवीण लबाना, डॉ भीमसिंह, डॉ. देवेंद्र डामोर, डॉ. दीपक पंकज, डॉ दीपिका रोत, बीपीओ पुष्पेंद्र सिंह मौजूद रहे। इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग से डीपीओ ललित सिंह झाला, अरबन डीपीओ वनिता त्रिवेदी, आम योजना के डीपीसी डॉ दिशांत जैन, डीएएसी गजेंद्र सिंह सागर, वीरेंद्र सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।


