‘जिंदगी मुस्कुराएगी….’ रायपुर जिला प्रशासन की इस पहल ने उन मासूम बच्चों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है, जिनकी जिंदगी को मायूसी के पर्दे ने लपेट लिया था। दरअसल, रायपुर जिला प्रशासन ने अलग–अलग स्कूलों में हेल्थ चेकअप के दौरान 19 बच्चों को सेलेक्ट किया था। जन्मजात हेल्थ प्राब्लम और एक्सीडेंटल केस के चलते इन बच्चों की जिंदगी आम बच्चों से अलग चल रही थी। ये बच्चे ठीक से चल नहीं पाते थे, नाक और मुंह का शेप–साइज असामान्य था, पैर आपस में जुड़े थे। हाथ जल जाने से उंगलियां नार्मल काम नहीं कर पा रही थी। अलगाव महसूस होने के कारण ये बच्चे स्कूल जाने से डरने लगे थे। कुछ परिवारों ने अपने बच्चों की समस्या दूर करनी चाही, पर सही इलाज नहीं मिल पाया। और कुछ पेरेंट्स इलाज का खर्च जानकर अस्पताल से वापस लौट गए। बच्चों की समस्या कलेक्टर गौरव सिंह तक पहुंची। अधिकारियों से चर्चा के बाद ये तय किया गया कि इन बच्चों का इलाज जिला प्रशासन मुफ्त में कराएगा। सीएम साय ने भी काम तत्काल आगे बढ़ाने के लिए मोटिवेट किया। प्लास्टिक एंड कास्मेटिक सर्जन डॉ सुनील कालड़ा ने इलाज करने की जिम्मेदारी ली। इसके बाद इन 19 बच्चों का इलाज अब शुरू हो चुका है, जिनमें से पांच बच्चों का इलाज पूरा हो गया है। ये बच्चे अपने घर लौट चुके हैं। बाकी बच्चों का इलाज भी एक–एक कर शुरू हो चुका है। इन बच्चों और इनके पेरेंट्स से हमने बात की। पेरेंट्स ने बताया इलाज का खर्च लगभग तीन से चार लाख रुपए था। हाथ में पैसे नहीं थे। बच्चों की लाइफ चेंज होगी, इसकी उम्मीद उन्होंने लगभग छोड़ दी थी। लेकिन अब उनके बच्चों की जिंदगी मुस्कुरा रही है। पढ़िए ये रिपोर्ट… सबसे पहले बात उन पांच बच्चों की जिनका इलाज पूरा हो चुका है…. पहली कक्षा में पढ़ने वाले टुकेश के पांव छोटे–बड़े थे, अब लगभग ठीक टुकेश कक्षा पहली में पढ़ते हैं। उन्होंने बताया– दोनों पांव के आकार सामान्य नहीं थे। एक पांव बड़ा और उसके तुलना में दूसरा पांव छोटा था। खेलने–चलने में समस्या होती थी। लेकिन इलाज के बाद अंतर बहुत कम हो गया है। वो पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं। इलाज कर रहे डॉ कालड़ा ने बताया– टुकेश को फुट डिफॉर्मिटी यानी पैर की विकृति थी। इसमें बच्चे के पैर का आकार या हड्डियां सामान्य नहीं होती। इसलिए उन्हें चलने में दिक्कत होती है। पैर टेढ़ा हो सकता है। या वो पैर जमीन पर ठीक से नहीं रख पाते। टुकेश को ये समस्या जन्म से है। इलाज के जरिए पांव को लगभग बराबर कर दिया है। थोड़ा अंतर है। लेकिन इससे उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। 12 साल की देवी की कलाई मुड़ गई, पैर जुड़े हुए थे, अब ठीक देवी टुकेश की बड़ी बहन है। दोनों तिल्दा–नेवरा के रहने हैं। देवी की एक हाथ की कलाई मुड़ी हुई थी। पैर आपस में जुड़े थे। स्कूल में सबसे अलग महसूस करती थी। लेकिन अब लगभग ठीक हो गई है और खुश है। डॉ कालड़ा ने बताया– देवी मल्टीपल लिम्ब डिफॉर्मिटीज के साथ पैदा हुई थी। इस समस्या में शरीर की दो या अधिक अंगों (हाथ-पैर) में संरचनात्मक विकृति या आकार/सामान्य बनावट में गड़बड़ी हो जाती है। इससे उनकी कार्यक्षमता बुरी तरह से प्रभावित होती है। बचपन में हाथ जला, ऑपरेशन कराया पर ठीक नहीं हुआ रायपुर, कुशालपुर के रहने वाले वरुण शर्मा कक्षा दसवीं में पढ़ते हैं। बचपन में एक एक्सीडेंट में हाथ जल गया था। ऑपरेशन हुआ लेकिन पूरी तरह हाथ ठीक नहीं हो पाया। वरुण ने बताया कि उनकी उंगलियां ठीक से मूवमेंट नहीं कर पाती थी। स्कूल वालों ने उन्हें डॉक्टर के पास भेजा। फिर से इलाज हुआ है। अब लगता है, सब ठीक हो जाएगा। डॉ कालड़ा ने बताया–वरुण पोस्ट बर्न कॉन्ट्रैक्चर से जूझ रहा था। दरअसल, जलने के बाद त्वचा, मांसपेशियां या आसपास के टिशु सिकुड़ने और कड़े होने लगते हैं। लचीलापन खोने लगते हैं। इससे हाथ-पैर या प्रभावित हिस्सा टेढ़ा, मुड़ा हुआ या सीमित गति वाला हो जाता है। वरुण का बायां हाथ प्रभावित हुआ जो अब ठीक है। नाक–मुंह और होंठ बिगड़ गए, लोगों को फेस करने में डरते थे बच्चे डॉ कालड़ा ने बताया- इन तीन बच्चों के अलावा जिनका इलाज पूरा होने पर उन्हें घर भेजा दिया गया है। इनमें एक प्रेम है। जिसे फेस डिफॉर्मिटी थी, यानी नाक और मुंह में विकृति थी। इसमें नाक और मुंह के आस–पास की संरचना बिगड़ जाती है। प्रेम की तरह एक दूसरी बच्ची भी इसी समस्या से जूझ रही थी। उसके मुंह और होंठ में विकृति थी। दोनों बच्चे इसके चलते नॉर्मल जिंदगी नहीं जी पा रहे थे। लेकिन अब ठीक हैं। दोनों का इलाज पूरा हो चुका है। कुछ दिन बाद उनकी लाइफ में भी सब नॉर्मल हो जाएगा। पेरेंट्स बोले– कई जगह गए कुछ नहीं हुआ, उम्मीद नहीं थी इलाज होगा देवी और टुकेश के माता–पिता सलेन्द्री निषाद और सूरज निषाद ने दैनिक भास्कर को बताया कि लंबे समय से इलाज के लिए कई अस्पतालों का चक्कर लगा चुके हैं। हिम्मत जवाब दे गई थी। बदलाव की उम्मीद नहीं थी। इस बीच जिला प्रशासन ने बच्चों काे इलाज के लिए भर्ती कराया। पूरा इलाज फ्री में हुआ। बच्चों की स्थिति पहले से बेहतर है। जिंदगी में इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। मां सलेन्द्री कहती हैं कि बच्चों की स्थिति देखकर हम तो मुस्कुराना ही भूल गए है। अब बहुत खुश हैं। वहीं वरुण की मां रूमंती देवी ने बताया कि पति बढ़ई का काम करते हैं। इलाज कराया था, लेकिन स्थिति बहुत बेहतर नहीं हो पाई थी। इतना पैसा नहीं था कि फिर से इलाज कराया जाए। लेकिन जिंदगी मुस्कुराएगी प्रोजेक्ट ने जिंदगी भर की परेशानी का हल कर दिया। कलेक्टर बोले – जिंदगी मुस्कुराती रहेगी, प्रोजेक्ट जारी रहेगा प्रशासन की इस पहल पर बात करते हुए कलेक्टर गौरव सिंह ने बताया कि स्कूलों और आंगनबाड़ियों ने हमने हेल्थ मॉनिटरिंग की थी। हम ऐसे बच्चों को फिल्टर करना चाहते जो शारीरिक समस्या के चलते खुद दूसरों से अलग मानने लगे थे। वे अवसाद में जा रहे थे। मॉनिटरिंग के दौरान 19 बच्चों में इस तरह की समस्या देखी गई। इनके पेरेंट्स के पास इतने पैसे नहीं थे कि खुद इलाज का खर्च उठा सकें। आगे डॉ कालड़ा से बातचीत हुई तो उन्होंने मुफ्त में इलाज करने के लिए हामी भरी। जिला प्रशासन की ओर उन्हें इलाज का सिर्फ एक तिहाई अमांउट ही दिया जा रहा है। हम आगे भी ये प्रोजेक्ट जारी रखेंगे। समाज के अन्य लोगों से भी मदद लेंगे।


