राजा राय| चाईबासा पश्चिमी सिंहभूम जिले के 18 प्रखंडों में कुल 2330 आंगनबाड़ी केंद्रों को नवंबर 2024 से सरकार की ओर से पोषाहार राशि नहीं मिली है। यानि 03 से छह साल के 79,632 बच्चों का पेट सेविकाएं व सहायिकाएं दुकानों से उधार लेकर भर रही हैं। जब इस बाबत भास्कर के रिपोर्टर ने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि हम लोग एक ही प्रतिष्ठान से सालों भर पोषाहार लेती हैं। जिसके कारण उन्हें हम पर विश्वास रहता है। जब पोषाहार नहीं देने की बात करते हैं, तो हमें भी इधर-उधर से रुपए जुगाड़ कर उन्हें देना पड़ता है। हम लोगों को भी जनवरी माह से मानदेय नहीं मिला है। सरकार को नियमित रूप से भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए। पड़ताल में पता चला कि किसी प्रखंड में नवंबर से तो किसी प्रखंड में दिसंबर माह से राशि का आवंटन नहीं हुआ है। जिले भर के कुल 2330 आंगनबाड़ी केंद्रों पर विगत 5-6 महीने में करीब 7 करोड़ रुपए का बकाया है। जिसमें पोषाहार के साथ अंडे की राशि भी संलग्न है। केंद्र के 60% अंश व राज्य के 40% अंश आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए दिया जाता है। लंबित भुगतान के बारे में जब जिला स्तर पर जानकारी ली गई तो बताया गया कि वित्तीय वर्ष अभी शुरू हुआ है। इस कारण कुछ विलंब हुआ है। उम्मीद है जल्द ही राशि जिलों को आवंटित कर दी जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्र-“बी’ गाड़ीखाना नगर परिषद चाईबासा के क्षेत्र में स्थित है। सेविका मनचला देवी के खुद के घर में संचालित है। किसी भी दृष्टिकोण से यह उचित नहीं है। बच्चे बरामदे में बैठकर सारी गतिविधियां करते हैं। छत पर एसबेस्टस लगा हुआ है। पंखे की कोई व्यवस्था नहीं है। गर्मी से बच्चे तरबतर नजर आए। बच्चों को सुबह में सूजी का हलवा दिया गया था। सेविका ने बताया कि हमें सब सामान उधार लेना पड़ता है। जिसके कारण रोजाना अंडा नहीं दे पाते हैं। सरकार की ओर से इन्हें ₹200 रूम व बिजली के लिए भाड़ा दिया जाता है। पोषाहार की राशि व मानदेय जनवरी महीने से नहीं मिला है। आंगनबाड़ी केंद्र-“सी’ गाड़ीखाना की सेविका शांता कुमारी हैं। रख-रखाव के अभाव में भवन के मेंटेनेंस की जरूरत है। खिड़की का ग्रिल आदि चोरी हो चुका है। बिजली की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बच्चों को गर्मी में काफी परेशानी हो रही है। पानी के लिए एक चापाकल लगा है। जिस पर मोहल्ले के लोग भी आश्रित हैं। शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दौरान रूम में पानी टपकता है। इन्होंने भी उधर पर पोषाहार लेने व मानदेय नहीं मिलने की पीड़ा बताई। आंगनबाड़ी केंद्र- “ए’ गाड़ीखाना इस आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका शांति करवा हैं। इस केंद्र का भवन काफी अच्छा है। किंतु मूलभूत सुविधा जैसे पानी केंद्र के अंदर उपलब्ध नहीं है। पानी के लिए छत पर टंकी लगी हुई है। जिसे पाइपलाइन से जोड़ा भी गया है। किंतु बिजली की व्यवस्था नहीं है। साथ ही सेविका ने बताया कि मोटर भी नहीं लगाया गया है। पानी नहीं रहने से हाथ मुंह धोने वाले बेसिन पर धूल की मोटी परत जम चुकी है। इन्होंने भी पोषाहार उधार लेने की बात कही। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों को तीन श्रेणी में रखा गया है। आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र 600, सक्षम 1208 एवं सामान्य श्रेणी के अंतर्गत 522 आंगनबाड़ी केंद्र वर्तमान में संचालित हैं। सामान्य श्रेणी के अंतर्गत वैसे केंद्र संचालित हैं, जिनका अपना भवन नहीं है। जिले भर के 2075 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में हैं। सरकार द्वारा तय पोषाहार के तहत बच्चों को भोजन में सूजी 14 ग्राम, चीनी 7 ग्राम, अंडा 01, चावल 70 ग्राम, दाल 30 ग्राम, सब्जी 10 ग्राम, तेल 4 ग्राम मिलता है। आंगनबाड़ी केंद्रों में गरीबों के तीन से छह वर्ष तक के बच्चे होते हैं। केंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के साथ अनौपचारिक शिक्षा व खेल का सामान मुहैया कराया जाता है। सदर प्रखंड अंतर्गत आधा दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया गया। सदर प्रखंड में कुल 168 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। जिसमें 28 मॉडल, 59 सक्षम व 81 सामान्य श्रेणी के केंद्र हैं। कुल 11,052 बच्चे हैं। 141 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में हैं। कई केंद्रों में बच्चों को अंडा नहीं दिया जा रहा है।


