राज्य सरकार ने जिला खत्म करने के बाद गृह महकमे में अब थानों के नए सिरे से सीमांकन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उधर, निरस्त सात जिलों में महिला थाने भी समाप्त कर दिए गए हैं, जिससे 210 पद भी समाप्त हो गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने पदों को यथावत रखने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन वित्त विभाग ने इसे नामंजूर कर दिया। राज्य सरकार ने हाल ही में गहलोत सरकार की ओर से बनाए गए 17 में से 9 जिले समाप्त कर दिए थे। जयपुर ग्रामीण एवं जोधपुर ग्रामीण को छोड़ कर केकड़ी, दूदू, नीमकाथाना, अनूपगढ़, सांचौर, गंगापुर सिटी एवं शाहपुरा जिला मुख्यालय पर एक-एक महिला थाना खोले जाने का प्रावधान किया था। इसमें लिए प्रत्येक थाने में एक सब इंस्पेक्टर, 4 एएसआई सहित 30 पुलिसकर्मियों का स्टाफ स्वीकृत किया गया। चूंकि अब जिले ही नहीं रहे तो इन 7 महिला थानों के साथ स्वीकृत नफरी को भी समाप्त कर दिया है। गृह विभाग का कहना है कि वित्त विभाग ने इन स्वीकृतियों को समाप्त कर दिया है। इसके लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। कुल 7 सब इंस्पेक्टर, 28 एएसआई, 21 हैड कांस्टेबल, 154 कांस्टेबल के पद समाप्त किए गए हैं। हाई कोर्ट ने कहा- सरकार बताए, गंगापुर सिटी जिला खत्म करने से पहले विवेक का उपयोग किया या नहीं गंगापुर सिटी जिला को 29 दिसंबर 2024 की नोटिफिकेशन के जरिए रद्द करने के मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि यह जिला खत्म करने के निर्णय में विवेक का उपयोग किया है या नहीं। साथ ही प्रार्थी से भी यह बताने के लिए कहा है कि उन्होंने पीआईएल दायर करने से पहले इस संबंध में जानकारी राज्य सरकार से प्राप्त करने के लिए क्या कार्रवाई की? साथ ही प्रार्थी को यह भी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने कोई ठोस आधार नहीं दिया तो पीआईएल हर्जाने सहित खारिज की जा सकती है। सीजे एमएम श्रीवास्तव व जस्टिस उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने यह निर्देश एमएलए रामकेश मीणा की पीआईएल पर सोमवार को दिया। प्रार्थी के अधिवक्ता सारांश सैनी ने कहा कि गंगापुर सिटी को जिले का दर्जा निर्धारित मापदंड के तहत दिया था। लेकिन प्रदेश में राज्य सरकार बदलने के बाद जिलों को लेकर राजनीति शुरू हुई। इन कारणों से ही मौजूदा राज्य सरकार ने कुछ जिलों का दर्जा समाप्त कर दिया है। गंगापुर सिटी का जिले का दर्जा खत्म करना भी राजनीतिक द्वेषता ही है। जबकि सरकार ने करीब डेढ़ साल पहले गंगापुर सिटी को जिला बनाया था। उसके बाद यहां कई प्रशासनिक नियुक्तियां हो चुकी हैं और विभाग भी बतौर जिला स्तर पर काम कर रहे हैं। कमेटी ने लोगों से आपत्तियां मांगने के बाद इसे जिला घोषित किया था। इस दौरान अदालत ने प्रार्थी से पूछा कि उन्होंने पीआईएल दायर करने से पूर्व राज्य सरकार से जिला निरस्त करने के आधारों की जानकारी मांगने के लिए क्या कार्यवाही की। जबकि प्रार्थी आरटीआई के तहत इसकी जानकारी ले सकता था, लेकिन उसकी ओर से ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिया है।


