डीग में जिला कलेक्टर ने जिले में चल रही प्रमुख ढांचागत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कार्यों की भौतिक स्थिति का आकलन करना और अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करना था। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण और आमजन को समय पर राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक के दौरान जिले में विद्युत आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए चल रही परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जयश्री जीएसएस (ग्रिड सब-स्टेशन) का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिससे क्षेत्र में वोल्टेज की समस्या से निजात मिलेगी। इसके अतिरिक्त रसिया, सिरथला, अंजारी डंगिका और सेमली जीएसएस के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष जीएसएस का कार्य भी मिशन मोड में पूरा किया जाए, ताकि आगामी गर्मी के मौसम से पहले ग्रामीणों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। शहरी विकास एवं कनेक्टिविटी: कुम्हेर हवाई पट्टी और ड्रेनेज पर मंथन
कुम्हेर क्षेत्र के सुनियोजित विकास को लेकर बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। जिला कलेक्टर ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से कुम्हेर हवाई पट्टी के विकास की संभावनाएं और वर्तमान स्थिति की जानकारी तलब की, जो भविष्य में जिले की हवाई कनेक्टिविटी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। वहीं, शहर को जलभराव से मुक्त करने और स्वच्छता के उच्च मानक स्थापित करने के लिए ड्रेनेज सिस्टम और ग्रे-वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट की कार्ययोजना पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया।
सड़क तंत्र को मजबूत करने के लिए डीग और नगर बाईपास के कार्यों की समीक्षा की गई, ताकि शहरों में यातायात का दबाव कम हो सके। इसके साथ ही, पहाड़ी से जुरहरा सड़क मार्ग की प्रगति जांची गई। अधिकारियों ने बताया कि उक्त मार्ग पर निर्माण कार्य प्रगतिरत है, जिस पर जिला कलेक्टर ने गति बनाए रखने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य सेवाएं: बेहतर समन्वय से विस्तार
कामां क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। जिला कलेक्टर ने चिकित्सा विभाग को निर्देशित किया कि वे अल्पसंख्यक मामलात विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें, ताकि कामां में क्रमोन्नत अस्पताल के कार्य को शीघ्र धरातल पर उतारा जा सके। यह पहल अंतर-विभागीय सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी।
बैठक के अंत में जिला ने सभी कार्यकारी एजेंसियों को निर्देशित किया कि वे जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें।


