जीआईएस से पहले उद्योग ​​​​​​​संवधर्न नीति:‘मेड इन मध्य प्रदेश’ ब्रांड-नेम बढ़ाने उद्योगों को सरकार देगी सब्सिडी- छूट

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले राज्य सरकार ने 24 से ज्यादा पॉलिसी को अपग्रेड किया है तो कुछ नई बनाई हैं। जीआईएस के लिए बनी मप्र एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी से ‘मेड इन मध्य प्रदेश’ ब्रांड नेम को विकसित करना और रोजगार बढ़ाना इसका प्रमुख उद्देश्य है। साल 2023-24 में प्रदेश की कुल जीडीपी 2.9 लाख करोड़ है। सरकार 2030 तक इसे 6 लाख करोड़ करना चाहती है। अगले पांच साल में 20 लाख नए रोजगार के अवसर जनरेट करना इसका प्रमुख लक्ष्य है। सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ के माध्यम से सरकार यह लक्ष्य हासिल करने के लिए 2025 से 2029 (पांच साल में) इंडस्ट्री लगाने से एक्सपोर्ट तक पांच साल में कुल 14794 करोड़ की सब्सिडी, छूट या सीधे सहायता राशि देगी। उद्योग विभाग के तैयार रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में इस पर 602 करोड़ खर्च होंगे। बदले में सरकार का केलकुलेशन है कि 1400 करोड़ का एसजीएसटी मिलना संभावित है। इसी तरह कर्मचारियों द्वारा व्यय योग्य आय में से व्यय राशि से करीब 1900 करोड़ रुपए मिलेंगे। मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री से होने वाली बिक्री से करीब 68 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे। इस तरह कुल 71 हजार करोड़ का जीएसटी कलेक्शन संभावित है। इस कवायद के प्रमुख उद्देश्य पहली बार एक्सपोर्ट करने वाली इंडस्ट्री को इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए एक करोड़ की सहायता मिल सकेगी एक्सपोर्ट बढ़ाने ग्रीन कार्ड स्कीम लाएगी सरकार एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक राजेश राठौर के मुताबिक सरकार मिनिमम इंस्पेक्शन एंड स्पीडी क्लियरेंस के लिए ग्रीन कार्ड स्कीम भी लाएगी। पोर्ट पर लगने वाले टर्न अराउंड समय को कम करना, ई-डिलिवरी आर्डर अपनाना, गेट ऑटोमेशन सिस्टम, मैनुअल फार्मों को बंद करना, 20 प्लस गति शक्ति कार्गो टर्मिनल का विकास भी सरकार की प्राथमिकता में है।

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