झारखंड ने जीएसटी से राज्य को मिलनेवाली राशि की अवधि को अगले पांच साल के लिए बढ़ाने की मांग की है। दिल्ली में शनिवार को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि 2017-2022 तक झारखंड ने मुआवजा कर के रूप में 41 हजार करोड़ रुपए का योगदान दिया। झारखंड को केंद्र से करीब 14 हजार करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में मिले। बैठक में राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के अतिरिक्त पांच लाख रुपए तक के स्वास्थ्य बीमा के भुगतान किए गए प्रीमियम पर जीएसटी में छूट दिया जाना चाहिए। गैर वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर लगनेवाले 18 फीसदी जीएसटी को घटा कर पांच फीसदी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड एक छोटा मैन्युफैक्चरिंग स्टेट है। जीएसटी प्रणाली के क्रियान्वयन से इसके आंतरिक राजस्व संग्रहण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। झारखंड के औद्योगिक उत्पादन एवं खनिजों का अधिकांशत: अंतरराज्यीय आपूर्ति की जाती है। वैट के दिनों में अंतरराज्यीय आपूर्ति पर राज्य को सीएमटी के रूप में राजस्व की प्राप्ति होती थी। लेकिन जीएसटी प्रणाली लागू होने से यह शून्य हो गया है। वैट में चक्रवृद्धि वार्षिक दर 16 फीसदी था, जीएसटी में घट कर 10 फीसदी हो गया है।


