उदयपुर में आदिवासी बहुल कोटड़ा इलाके में जीप ड्राइवर आरटीओ नियमों का खुलेआम मखौल उडा रहे हैं लेकिन आरटीओ इन पर कोई नियमित कार्रवाई नहीं करता। जीप 7 सीटर होने के बावजूद ड्राइवर इसमें 25 से 30 सवारियां ठूंस-ठूंसकर बैठाते हैं। जीप के बोनट से लेकर जीप की छत और पीछे तक यात्रियों का झुंड दिखना यहां आम बात है। इतना ही नहीं, ड्राइवर सीट के दायं और बायं खिड़की पर यात्री लटके होते हैं। कई बार यात्रियों की झुंड में दूर से जीप नजर तक नहीं आती। ये हालात यहां दशकों से हैं। एक दिन पूर्व हुई दुर्घटना के दूसरे दिन गुरुवार को यहां आरटीओ की कोई सख्ती नहीं दिखी। ओवरलोड जीप धडल्ले से चार गुना सवारियां बैठाकर दौड़ रही है। RTO ने ओवरलोड दुर्घटनाग्रस्त जीप का फिटनेस-इंश्योरेंस चेक तक नहीं किया
मामले में कार्यवाहक जिला परिवहन अधिकारी मुकेश डाड का कहना है कि उनके पास स्टाफ है और कोटड़ा की यहां से दूरी ज्यादा है। ऐसे में नियमित कार्रवाई नहीं हो पाती। उनसे पूछा कि कोटड़ा में एक दिन पूर्व बेकाबू हुई ओवरलोड जीप की फिटनेस और इंश्योरेंस थे या नहीं। इस पर वे बोले-व्यस्तता के कारण उन्हें पता करने का समय नहीं मिला। शुक्रवार को वे इस संबंध में पता कर रिपोर्ट बनाएंगे। एक दिन पूर्व जीप खाई में गिरी, 3 की मौत और 19 हुए थे घायल
एक दिन पहले इसी कोटड़ा के डिंगावरी में 27 सवारियों से भरी जीप बेकाबू होकर 60 फीट गहरी खाई में गिर गई थी। चढ़ाई के दौरान अचानक ब्रेक फेल होने से ये हादसा हुआ। ओवरलोड होने से ड्राइवर संभाल नहीं पाया। हादसे में 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि 19 लोग घायल हुए थे। इनमें 9 गंभीर घायल हैं जिनका इलाज जारी है। कोटड़ा-उदयपुर रोड पर महज 2 बसों का ही संचालन
कोटड़ा-उदयपुर रोड़ पर मात्र 2 बसों का संचालन भी इसकी एक बड़ी वजह है। ऐसे में यात्रियों को मजबूरन जीप में सफर करना पड़ रहा है। घने जंगल के बीच होकर यह रास्ता गुजरता है ऐसे में यहां जीप के अलावा अन्य साधन भी नहीं चलते। आर्थिक रूप से यह आदिवासी बहुल इलाका बेहद पिछड़ा है। ज्यादातर लोग शहर में मजबूरी या अन्य काम करने आते हैं। कई लोग खेती करते हैं।


