हनुमानगढ़ में राजस्थान पेंशनर समाज की गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित पेंशनर्स हॉल में बैठक आयोजित की गई। इसमें पेंशनर्स से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में लंबित पेंशन प्रकरणों, भुगतान में देरी, जीवित प्रमाण पत्र की जटिल प्रक्रिया और आवश्यक दवाइयों की अनुपलब्धता जैसे प्रमुख मुद्दे उठाए गए। बैठक की अध्यक्षता पेंशनर समाज के अध्यक्ष अशोक खत्री ने की। उन्होंने बताया कि कई पेंशनर्स को समय पर पेंशन और अन्य फायदा नहीं मिल पा रहे हैं। तेजपाल पंडा और कौशल कुमार के पेंशन प्रकरण अब भी लंबित हैं। सुनील बहल की बढ़ी हुई ग्रेच्युटी स्वीकृत होने के बावजूद उसका भुगतान नहीं किया गया है, जिससे संबंधित पेंशनर्स को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जीवित प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में आ रही तकनीकी खामियों पर भी चिंता व्यक्त की गई। अशोक खत्री ने बताया कि भारत सरकार के पोर्टल अथवा अन्य ऑनलाइन माध्यमों से जमा किए गए जीवित प्रमाण पत्र राजस्थान सरकार के पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए जिला शाखा की ओर से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत तीन सेवानिवृत्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं, जो राज्य सरकार से प्रदत्त अधिकारों के तहत दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें ट्रेजरी कार्यालय में जमा करवा रहे हैं। बैठक में पेंशनर्स को नियमित रूप से मिलने वाली ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य आवश्यक दवाइयों की कमी का मुद्दा भी उठा। बताया गया कि दवा विक्रेताओं को भुगतान लंबित होने से आपूर्ति प्रभावित हो रही है। पेंशनर समाज ने सरकार से इस समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की है। अध्यक्ष अशोक खत्री ने यह भी बताया कि 17 जनवरी को जयपुर में हुई प्रांत स्तरीय कार्यकारिणी बैठक में आठवें वेतन आयोग में पेंशनर्स को शामिल नहीं किए जाने पर चिंता व्यक्त की गई थी। साथ ही, डीएस नाकरा से जुड़े ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय की प्रतिमाएं सभी जिला शाखाओं में स्थापित करने का प्रस्ताव पारित हुआ। इसके अलावा, जिलों और तहसीलों में पेंशनर्स भवन के लिए खाली या अनुपयोगी सरकारी भूमि आवंटित करने पर भी चर्चा की गई।


