ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सोमवार को कहा कि झारखंड में अगले साढ़े पांच महीने तक मनरेगा पहले जैसे ही चलते रहेगी। छह माह बाद जो नई स्कीम आ रही है, उसमें क्या प्रावधान किया जाएगा, उसे देखते हुए राज्य सरकार एक उपयुक्त गाइडलाइन बनाएगी। दीपिका पांडेय सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को मनरेगा एवं विकसित भारत गारंटी (वीबी- जी राम जी) योजना के प्रावधानों को लेकर बैठक हुई। इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, मनरेगा आयुक्त, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स शामिल हुए। बैठक में कहा गया कि 100 दिनों की वैधानिक रोजगार गारंटी को 125 दिन करने का प्रस्ताव जमीनी हकीकत से दूर और भ्रामक है। श्रम बजट के स्थान पर नॉर्मेटिव एलोकेशन, मजदूरी दर का केंद्रीकरण और 60 दिनों का अनिवार्य मोराटोरियम श्रमिक-प्रधान राज्य झारखंड के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीण विकास मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी छह महीनों में राज्य के अधिकतम परिवारों को कम से कम 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि मनरेगा की मूल भावना, संवैधानिक गारंटी और गरीबों के अधिकारों की पूरी मजबूती से रक्षा की जा सके। पलायन, भुखमरी और सामाजिक असुरक्षा बढ़ेंगे मंत्री ने कहा कि नई योजना से पलायन, भुखमरी और सामाजिक असुरक्षा का खतरा बढ़ेगा। राज्य में संचालित कृषि एवं बागवानी आधारित योजनाएं भी प्रभावित होंगी। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस को अनिवार्य करना व्यावहारिक चुनौतियां पैदा करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुल व्यय का 40 प्रतिशत वित्तीय भार राज्यों पर डालना संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है। राज्यों को विश्वास में लिए बिना केंद्र सरकार द्वारा ऐसी योजनाएं लागू करना संघीय व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।


