जून में अब तक कई जिले सूखे…आज भी नो रेन-डे:औसत से आधी बारिश भी नहीं हुई, खरीफ की फसलों पर पड़ सकता है असर

छत्तीसगढ़ में जून अब तक प्रदेश के आधे से ज्यादा जिले सूखे की स्थिति में हैं। औसत से आधी बारिश भी नहीं हुई है। एक्सपर्ट का मानना है कि यही स्थिति रही तो इसका असर खरीफ की फसलों पर पड़ेगा। वहीं आज भी मौसम विभाग ने नो रेन डे एनाउंस किया है। सिर्फ एक से दो जगहों पर ही हल्की बारिश का अनुमान है। हालांकि कल यानी 11 जून से गरज-चमक के साथ बारिश की एक्टिविटी में तेजी आ सकती। लेकिन अब तक बीता जून का महीना बारिश के लिहाज से छत्तीसगढ़ के लिए खास नहीं रहा। ऐसा इसलिए क्योंकि 16 दिन पहले मानसून आने के बाद भी प्रदेश में पिछला एक सप्ताह ड्राइ रहा। 9 जून को भी केवल बस्तर जिले के दो ही जगह बारिश रिपोर्ट की गई। मौसम विभाग के मुताबिक आज उत्तर छत्तीसगढ़ के 3, मध्य छत्तीसगढ़ के 6 और बस्तर संभाग सहित 15 जिलों में बिजली गिरने का अलर्ट है। सोमवार की बात करें तो 41.°C के साथ सबसे गर्म बिलासपुर रहा। अगले 24 घंटे तापमान में कोई विशेष बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। जून में अब तक सामान्य से कम बारिश अब तक की बात करें तो जून में 33 में से 27 जिले (लगभग 82%) में बारिश सामान्य से कम रही है। सिर्फ 6 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक रही है। पूरे राज्य में औसतन 51% वर्षा की कमी है, जो सामान्य से कम मानी जाती है। इस समय मानसून की स्थिति कमजोर है और स्थिति यही रही, तो खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। जून का रहा है यही ट्रेंड हालांकि मौसम विभाग की माने तो जून का ट्रेंड यही रहा है। शुरूआती 10 से 12 दिन गर्मी बढ़ती है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले लो प्रेशर एरिया या चक्रवातों के चलते मानसून सक्रिय हो जाता है। इस बार भी ऐसा ही होने की उम्मीद है। ओवर ऑल बात करें तो जून में अब तक 51% कम बारिश हुई है। पिछले साल के मुकाबले स्थित बेहतर हालांकि इस बार की स्थित पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। साल 2024 में जून का अधिकतम तापमान 45.7°C था, जो 1 जून को दर्ज किया गया था। जबकि इस साल अधिकतम तापमान अब तक 42 से 43°C के आस-पास ही रहा है। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.5°C 19 जून को रिकॉर्ड किया गया था। पिछले साल जून में पूरे महीने के औसत तापमान की बात करें तो 38.6°C रहा था। वहीं न्यूनतम औसतन तापमान 27.7°C दर्ज किया गया था। मई में 374 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी पिछले माह लगातार बने सिस्टम और करीब 14 दिन पहले आए मानसून ने पूरे छत्तीसगढ़ में मई महीने में जमकर बारिश कराई। इस दौरान औसत से 373 फीसदी ज्यादा पानी गिर गया। इसके बाद से मानसून पिछले करीब 12 दिनों से ठहरा है। यह आगे ही नहीं बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में 22 मई से 28 मई के बीच 53.51 मिलीमीटर औसत बारिश हो चुकी है। प्रदेश में मानसून में औसतन 1200 मिलीमीटर पानी बरसता है। पिछले साल 1276.3 MM पानी गिरा था। सप्ताह भर में थम गया मानसून पिछले सात दिन में बारिश की रफ्तार लगातार फ्लेक्चुएट होती रही है। जहां रविवार 1 जून को 33 जगहों पर बारिश हुई। सोमवार को सिर्फ तीन जगहों और मंगलवार को केवल एक ही जगह पर बारिश हुई। वहीं 4 मई बुधवार और 5 मई गुरुवार को कहीं भी बारिश नहीं हुई। शुक्रवार यानी 6 मई को पांच जिलों में बारिश हुई। वहीं शनिवार को सिर्फ एक और रविवार यानी 8 मई को चार जिलों में ही बारिश रिकॉर्ड की गई। सोमवार को केवल बस्तर जिले में न्यूनतम 10 मिमी बारिश दर्ज की गई। प्रदेश के बदलते तापमान को दो इंफोग्राफिक से समझिए गरज-चमक, बिजली और ओले गिरने के दौरान इन बातों का रखें ध्यान लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियम समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है।

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