जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (जेडडीपीएल) के बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बड़ी कानूनी सफलता हाथ लगी है। पीएमएलए विशेष न्यायालय, इंदौर ने आदेश दिया है कि इस केस में कुर्क की गई 180.87 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां संबंधित बैंकों को लौटाई जाएं। इस प्रक्रिया को कानून की भाषा में रिस्टिट्यूशन कहा जाता है, यानी जिन पक्षों को वित्तीय नुकसान हुआ है, उन्हें उनकी संपत्ति या धन वापस दिलाना। अदालत के आदेश के बाद अब ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियां बैंकों को सौंपी जाएंगी, जिन्हें बैंक नीलाम कर अपने नुकसान की भरपाई कर सकेंगे। यह आदेश बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ित बैंकों को राहत दिलाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सीबीआई की FIR से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा मामला सीबीआई की बैंक सिक्योरिटी एंड फ्रॉड सेल, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर से संबंधित है। एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज की गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, जूम डेवलपर्स प्रा. लि., उसके निदेशक विजय मदनलाल चौधरी तथा बिहारी लाल केजरीवाल सहित अन्य आरोपियों ने मिलकर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के नेतृत्व वाले 22 बैंकों के कंसोर्टियम से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की। जांच में सामने आया कि इस बैंक कंसोर्टियम को लगभग 2,650 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। कंसोर्टियम का अर्थ है कई बैंकों का एक समूह, जो मिलकर किसी परियोजना या कंपनी को ऋण प्रदान करता है। कागजी अनुबंधों के आधार पर लिया गया कर्ज
ईडी और सीबीआई की जांच में यह तथ्य सामने आया कि जेडडीपीएल ने स्वयं को कंसल्टेंसी और इंजीनियरिंग सेवाएं देने वाली कंपनी बताकर बैंकों से ऋण लिया। इसके लिए यह दर्शाया गया कि विदेशी कंपनियों को अमूर्त (इंटैन्जिबल) इंजीनियरिंग सेवाएं दी जानी हैं। बैंकों से लिया गया कर्ज विदेशी एग्रीगेटर्स के पक्ष में जारी बैंक गारंटी के रूप में था। एग्रीगेटर्स ऐसी मध्यस्थ कंपनियां होती हैं, जो सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करती हैं। खुलासा…देश-विदेश में डायवर्ट की गई लोन राशि
जांच एजेंसियों के अनुसार, ऋण की राशि का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया, जिसके लिए कर्ज लिया गया था। यह रकम भारत में स्थित समूह कंपनियों, ट्रस्टों व विदेशों में मौजूद संस्थाओं में डायवर्ट कर दी गई। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि जिन विदेशी एग्रीगेटर्स के नाम पर लेन-देन दिखाया गया था, वे वास्तव में जेडडीपीएल के निदेशक विजय मदनलाल चौधरी के प्रभावी नियंत्रण और प्रबंधन में थे। न्यायनिर्णायक प्राधिकरण ने कुर्कियों को वैध माना
ईडी ने इस मामले में पहले संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। बाद में न्यायनिर्णायक प्राधिकरण ने इन कुर्कियों को वैध ठहराया। प्रकरण में 17 जुलाई 2015, 30 जून 2017 और 18 दिसंबर 2022 को तीन अभियोजन शिकायतें दाखिल की गई थीं। पीएमएलए विशेष न्यायालय ने इन सभी शिकायतों पर संज्ञान लिया है, यानी मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। 2025 में पीएनबी ने मांगी थी संपत्ति वापसी
पीएनबी ने प्रमुख बैंक होने के नाते 23 जनवरी 2025 को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें अदालत को यह अधिकार है कि वह कुर्क संपत्तियों को वास्तविक पीड़ितों को लौटाने का आदेश दे सके। इसके अलावा आईडीबीआई बैंक, जो इस कंसोर्टियम का हिस्सा नहीं था, ने भी अलग से संपत्ति वापसी के लिए आवेदन दिया था। पीएनबी कंसोर्टियम और आईडीबीआई बैंक को अलग-अलग राहत अदालत के आदेश के अनुसार- {पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम को 106.5 करोड़ रुपए के उचित बाजार मूल्य वाली तीन कुर्क संपत्तियां लौटाई जाएंगी। {आईडीबीआई बैंक के पक्ष में 74.37 करोड़ रुपए मूल्य की 21 कुर्क संपत्तियों की वापसी का आदेश दिया गया है।


