जूली बोले- अरावली हमारे लिए मां बराबर:अरावली को माफिया के पैरों की धूल नहीं बनने देंगे,सुप्रीम कोर्ट का फैसला जनता के संघर्ष की जीत

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा से जुड़े मुद्दे पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का पुरजोर स्वागत किया है। जूली ने इसे जनता के सामूहिक संघर्ष और पर्यावरण की बड़ी जीत करार दिया है। जूली ने बयान जारी कर कहा कि अरावली राजस्थान के मस्तक का तिलक है, यह हमारी अस्मिता और सुरक्षा का कवच है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि भाजपा सरकार की नाक के नीचे खनन माफिया इस तिलक को मिटाकर इसे अपने पैरों की धूल बनाने पर आमादा है। जूली ने कहा- शनिवार को अलवर में ‘अरावली बचाओ जन-जागरण अभियान’ के तहत पैदल मार्च और संघर्ष अलवर की सड़कों पर शुरू हुआ था, वहीं प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस समेत सभी जागरूक लोग अपने – अपने स्तर पर आक्रोश व्यक्त कर रहे थे, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने अपने पिछले फैसले पर स्टे देकर उस पर मुहर लगा दी है। अरावली मां और सरिस्का का सौदा बर्दाश्त नहीं जूली ने चेतावनी देते हुए कहा कि अरावली हमारे लिए केवल पहाड़ नहीं, बल्कि मां के समान है। अरावली मां का सौदा करने वालों को अलवर और राजस्थान की जनता कभी माफ नहीं करेगी। हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अरावली पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित नहीं हो जाती। हमें पूर्ण विश्वास है कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में एक ऐतिहासिक और अंतिम निर्णय आएगा। सरिस्का को हर कीमत पर बचाया जाएगा और इसका सौदा करने वालों के खिलाफ लोहा लिया जाएगा। सरिस्का अलवर का ताज है और इसे किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे।

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