जेईई-मेन के जनवरी-सेशन का आयोजन 21 जनवरी से हो रहा है। परीक्षा में इस साल 13 लाख स्टूडेंट्स के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों की एक सीट पर एडमिशन के लिए लगभग 21 स्टूडेंट्स के बीच कंपीटिशन होगा। एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि जेईई-मेन-एडवांस्ड के तहत देश के आईआईटी, एनआईट तथा गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स-जीएफटी आई संस्थानों के बी-टेक, इंटीग्रेटेड एम-टेक तथा डुएल-डिग्री पाठ्यक्रमों की इंजीनियरिंग सीटों पर प्रवेश मिलेगा। शर्मा ने बताया कि अब तक जेईई-मेन के प्रारंभिक शिफ्टों के प्रश्नपत्र आसान होने का ट्रेंड रहा है। उन्होंने बताया कि सम्मिलित होने की विद्यार्थियों को इस समय क्वालीफाइंग-कट आफ, क्वेश्चन पेपर डिफिकल्टी लेवल तथा पेपर लीक की अनावश्यक चर्चाओं से भी दूरी बनाकर रखनी होगी। स्टूडेंट्स के लिए उन्होंने टिप्स देते हुए कहा कि प्रश्नपत्र को स्टूडेंट्स दो-चरणों में हल करें। पहले चरण में तीनों-विषयों के वे प्रश्न हल करें जिन्हें हल करने में उन्हें सहजता महसूस हो रही हो। दूसरे चरण में वे प्रश्न करें जिन्हें हल करने में थोड़ा समय लगने की संभावना है लेकिन स्टूडेंट्स को यह आत्मविश्वास है कि वह प्रश्न को हल कर सकता है। ऐसे प्रश्नों पर अपना समय नहीं गवाएं जहां वे बेहद असहज है। सभी प्रश्न समान अंकों के हैं ऐसे में अनावश्यक तौर पर किसी प्रश्न विशेष को प्रतिष्ठा का विषय बनाकर नहीं उलझें। किसी विषय-विशेष के लगातार दो-पांच प्रश्नों के कठिन होने पर घबराएं नहीं। सहजता से हल हो चुके प्रश्नों को दोबारा हल करने की गलती नहीं करें। गणना के काम के दौरान ‘मेथड आफ एप्रोक्सीमेशन’ का उपयोग प्रश्न पत्र के पार्ट-ए ‘एमसीक्यू’ आधारित प्रश्नों में तो सहायक साबित होता है लेकिन पार्ट-बी न्यूमेरिकल-बेस्ड प्रश्नों में नहीं, इसका का विशेष ध्यान रखें। परीक्षा के दौरान कोई तकनीकी खराबी हो तो तुरंत इनविजीलेटर को सूचना दें।


