जेएलएफ में शनिवार शाम यौन उत्पीड़न पर आयोजित विशेष सत्र में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जे-पाल एशिया के सर्वे में खुलासा हुआ कि जयपुर में 50% महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार हुई हैं, जबकि दिल्ली में यह आंकड़ा 66% तक पहुंच गया है। पिछले वर्ष जयपुर में 47% और दिल्ली में 64.7% यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज किए गए। ‘द सिटी थ्रू हर आईज़: वॉइस ऑन सेक्सुअल हरासमेंट इन इंडिया’ विषय पर आयोजित चर्चा में प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि यौन उत्पीड़न से जुड़े कानूनों की जानकारी हर नागरिक को होनी चाहिए। विशेषकर कॉलेजों में छात्रों को इस विषय पर जागरूक करने की आवश्यकता है। सत्र में अरुणा रॉय, सीमा जयचंद्रन, अभिजीत बनर्जी और प्रमोद भसीन जैसे विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। चर्चा में राजस्थान के प्रसिद्ध भंवरी देवी कांड का भी उल्लेख किया गया। दशकों बीत जाने के बाद भी भंवरी देवी को न्याय नहीं मिल पाया है, जो महिला सुरक्षा के मामले में व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में एक-दूसरे का सम्मान करना और यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना आवश्यक है। अरुणा रॉय ने इस मुद्दे पर अपने विचार रखते हुए कहा- अगर समाज का हर व्यक्ति जागरूक हो, खासकर पुरुष वर्ग, तो इस दिशा में सुधार संभव है। उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस स्टेशन से जुड़े महिला सुरक्षा केंद्र बनाए जा सकते हैं और उन्हें मजबूती के साथ चलाया जा सकता है। सीमा जयचंद्रन ने भी इस विषय पर अपनी चिंता जताई और कहा- यौन उत्पीड़न सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि हमें खुद से यह सवाल करना चाहिए कि ऐसी स्थिति कब तक चलेगी। इस चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि यौन उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सोच और व्यवहार में बदलाव लाना भी जरूरी है। इसके लिए शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।


