जेकेके में शिल्पकार आर्ट एंड क्राफ्ट प्रदर्शनी का आगाज:12 शिल्पकारों ने दिखाया हुनर, रत्नों और लकड़ी पर दिखी अनूठी कारीगरी

राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और शिल्पकला की समृद्ध परंपरा को समर्पित शिल्पकार आर्ट एंड क्राफ्ट प्रदर्शनी 2025 का शुभारंभ शुक्रवार को जवाहर कला केंद्र में हुआ। इसका उद्घाटन विधायक गोपाल शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष के.एल. जैन, डीसी हैंडीक्राफ्ट्स सीतापुरा जयपुर के वरिष्ठ सहायक निदेशक रजत वर्मा और वरिष्ठ कला पारखी सुधीर माथुर भी उपस्थित रहे। इस प्रदर्शनी में राजस्थान के 12 प्रतिष्ठित शिल्पकारों की कृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान और पहचान मिल चुकी है। प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रत्न शिल्पकार पृथ्वीराज कुमावत द्वारा बनाया गया पन्ना रत्न जड़ित उत्कृष्ट शिल्प है, जिसमें गणेशजी की जटिल आकृतियां बारीकी से उकेरी गई हैं। यह 2367 कैरेट का शिल्प 8 सेमी ऊंचा और 9 सेमी चौड़ा है, जिसे फूलों और पत्तियों की नक्काशी से सजाया गया है। जेमस्टोन पेंटिंग में बजरंगबली का चित्रण
इसी तरह, राज्य स्तरीय एवं कला रत्न पुरस्कार से सम्मानित सुनीश मारू ने अपनी विश्व प्रसिद्ध जेमस्टोन पेंटिंग प्रदर्शित की, जिसमें बजरंगबली का चित्रण है। इस शैली की खासियत है कि पेंटिंग को कांच के पीछे से बनाया जाता है। राम सोनी द्वारा बनाई गई सांझी आर्ट (पेपर कटिंग) कृति में भगवान कृष्ण को यमुना तट पर कदंब के वृक्ष के नीचे बांसुरी बजाते और गाय चराते हुए दिखाया गया है, जो गोचारण लीला को जीवंत करता है। वहीं शिल्पगुरु विनोद कुमार जांगिड़ की चंदन की लकड़ी पर बनी नक्काशी में भगवान महावीर के मंदिर में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों का चित्रण दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। परंपरा और नवाचार का संगम
प्रदर्शनी में शामिल सभी शिल्पकार अपनी परंपराओं को संरक्षित रखते हुए आधुनिक प्रयोगों से उन्हें नए आयाम दे रहे हैं। यही कारण है कि राजस्थान की शिल्पकला न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराही जा रही है। यह प्रदर्शनी दर्शकों को भारतीय शिल्पकला की अनंत सुंदरता और विविधता से रूबरू कराने का बेहतरीन माध्यम बन रही है।

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