हर मानसून में जलभराव से जूझने वाले जयपुर के लिए अब ठोस कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पहली बार जेडीए, नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग मिलकर शहर का मेजर कॉम्प्रिहेंसिव ड्रेनेज प्लान बनाएंगे। इसका उद्देश्य केवल पानी की निकासी नहीं, बल्कि बढ़ती बारिश और बदलते शहरी ढांचे को ध्यान में रखकर आपदा से पहले तैयारी करना है। इस साझा ड्रेनेज प्लान की शुरुआत सांगानेर और पृथ्वीराज नगर योजना (दक्षिण क्षेत्र) से होगी, जहां जलभराव की समस्या सबसे अधिक रहती है। इन इलाकों के लिए करीब 250 करोड़ रुपए की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। योजना का निर्माण तकनीकी एजेंसी नेबकॉन करेगी। अब तक जेडीए और नगर निगम अपने-अपने क्षेत्रों में अलग-अलग ड्रेनेज प्लान बनाते रहे हैं, लेकिन पहली बार आपदा प्रबंधन विभाग को भी इसमें शामिल किया गया है, ताकि बारिश को केवल निकासी की समस्या नहीं, बल्कि आपदा के रूप में देखा जा सके। इस संबंध में जेडीसी सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में डिजास्टर मैनेजमेंट पर अहम बैठक हुई। सांगानेर और पृथ्वीराज नगर से की जाएगी शुरुआत कमेटी बनेगी, अलग फंड से होगा काम : जेडीसी ने तीनों विभागों को सिंगल, इंटीग्रेटेड ड्रेनेज प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन के लिए विशेष फंड बनाया जाएगा, जिसमें एसडीआरएफ के साथ जेडीए-निगम भी योगदान देंगे। तकनीकी निगरानी को तीनों विभागों के अभियंताओं की संयुक्त कमेटी गठित होगी। बीते 10 वर्षों में औसत बारिश 30% बढ़ी 3.5% की दर से बढ़ रहा शहर का बिल्ट-अप एरिया हर साल 31% बिल्ट-अप 1991 में एरिया 2021 में 67% हो गया 174 वर्ग किमी पक्का निर्माण था वर्ष 2000 में, अब 300 वर्ग किमी हुआ। जयपुर का पुराना ड्रेनेज सिस्टम 12 से 20 मिमी बारिश के हिसाब से बना है, जबकि अब कई बार 40 मिमी तक बारिश एक साथ हो रही है। जेडीए-निगम-आपदा प्रबंधन पहली बार साथ


