जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा:CMHO से शिकायत, कहा- खा लेता तो कौन होता जिम्मेदार; जून 2027 है एक्सपायरी डेट

मध्यप्रदेश के लोगों के मन में कोल्ड्रिफ सिरप कांड अभी उतरा भी नहीं कि भोपाल जिला अस्पताल (जय प्रकाश) में फफूंद लगी दवा का मामला सामने आया है। एक मरीज शुक्रवार शाम की ओपीडी में हड्‌डी रोग विशेषज्ञ को दिखाने पहुंचा। पैर में फ्रेक्चर की आशंका जताते हुए डॉक्टर ने एक्सरे और दर्द की दवा लिखी। मरीज ने अस्पताल की फार्मेसी से दवा ली, जिसमें फफूंद लगी हुई थी। इसी शिकायत मरीज ने मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनीश शर्मा को ईमेल के मध्यम से भी की है। साथ ही दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। मरीज का आरोप है कि यदि वह जल्दबाजी में दवा खा लेता, तो उसकी तबीयत बिगड़ सकती थी और इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई और उनकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवा निगम लिमिटेड (MPPHSCL) की है। MPPHSCL के जरिये सेंट्रल फार्मेसी से मांग आने पर जिला एवं अन्य अस्पतालों को दवा सप्लाई की जाती है। जून 2027 है एक्सपायरी डेट
मरीज सतीष को जो दवा की स्ट्रिप दी गई है, उस पर एक्सपायरी डेट जून 2027 लिखी हुई है। यह दर्द में दी जाने वाली डिक्लोफेनाक 50 एमजी की टैबलेट है। जिसका बैच नंबर DSM 25002 है। यह दवा MPPHSCL के द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को जेपी अस्पताल को मुहैया कराई गई थी। ओपीडी में नहीं था सीनियर डॉक्टर
पीड़ित मरीज सतीष सेन के अनुसार, यह घटना शुक्रवार शाम करीब 5 बजे की है। पैर में चोट लगने के बाद वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे। वे सबसे पहले हड्डी रोग विभाग (ऑर्थोपेडिक) पहुंचे, लेकिन वहां उस समय कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था। मरीज का कहना है कि लंबे समय तक इंतजार के बावजूद जब वरिष्ठ चिकित्सक नहीं मिले, तो वहां मौजूद इंटर्न डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया और दर्द की दवा लिख दी। अस्पताल के मेडिकल स्टोर से ली गई थी दवा
इंटर्न डॉक्टरों द्वारा लिखी गई पर्ची के आधार पर सतीष सेन ने अस्पताल परिसर में स्थित फार्मेसी से दवा ली। मरीज का कहना है कि उस समय न तो दवा की पैकिंग में कोई स्पष्ट चेतावनी दिखी और न ही फार्मेसी कर्मचारी ने दवा की स्थिति को लेकर कोई जानकारी दी।
मरीज सतीष सेन के अनुसार, जब वे घर पहुंचे और दवा को ध्यान से देखा, तो उन्हें फफूंद (फंगस) जमी दिखी। मरीज का कहना है कि यदि वह जल्दबाजी में या दर्द के कारण तुरंत दवा खा लेता, तो उसकी सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता था। मरीज ने अपनी शिकायत में साफ लिखा है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मरीज की जान से खिलवाड़ है। सरकारी अस्पतालों से मिलने वाली दवाओं पर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। सतीष सेन ने कहा कि वह खुद सतर्क था, इसलिए दवा देख ली, लेकिन हर मरीज इतना सतर्क नहीं होता। लिखित शिकायत में रखी यह मांग दवाओं की गुणवत्ता पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई बार एक्सपायर्ड, संदिग्ध या खराब स्टोरेज वाली दवाओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। NHM के पूर्व संचालक डॉ. पंकज शुक्ला के अनुसार, फफूंद लगी दवाएं सेवन करने से संक्रमण, एलर्जी, लिवर और किडनी को नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं में फंगस बेहद खतरनाक हो सकता है। वहीं, मामले में CMHO मनीष शर्मा से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। हालांकि, टेक्स्ट मैसेज के जरिए उन्होंने मीटिंग में होने की जानकारी दी है।

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