जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड नक्सली ने तेलंगाना में डाले हथियार

भास्कर न्यूज | दोरनापाल बस्तर में सक्रिय रहा दक्षिण बस्तर का डीवीसीएम मंदा रूबेन उर्फ कन्नन्ना उर्फ मंगन्ना उर्फ सुरेश ने तेलंगाना राज्य के वारंगल जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करते हुए मंदा रूबेन ने अपने करीब 44 सालों के नक्सल जीवन को त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौट गया। मंदा रूबेन पर करीब 10 लाख से ज्यादा का ईनाम घोषित है। रूबेन दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव भी रहा है। बताया जाता है कि रूबेन 44 सालों से अंडरग्राउंड होकर काम करता रहा। वर्ष 1991 में जब उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया और केंद्रीय जेल जगदलपुर में बंद किया तो उसने जेल में ही अशोक, राजन्ना और नंदू के साथ फरार होने की योजना बनाई। उसने छत काटकर, टाइल्स हटाकर चादर-तौलियों के सहारे जेल की दीवार फांदी और भाग निकला। इस घटना को जगदलपुर जेल ब्रेक के नाम से जाना जाता है। जेल से भागने के बाद 1992 में वह दोबारा कोंटा दलम में शामिल हो गया।

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