अमेरिका के कृषि वैज्ञानिक जैविक खेती के नवाचारों का अध्ययन करने के लिए भारत पहुंचे हैं। वे राजस्थान के झुंझुनूं जिले में जैविक खेती के मॉडल का बारीकी से अवलोकन करेंगे। यह दल 25 और 26 सितंबर को झुंझुनूं के पोंख क्षेत्र में अध्ययन करने का कार्यक्रम रहा। खेती में रसायनों के बढ़ते उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है और खाद्यान्न से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में राजस्थान में जैविक खेती का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ रहा है, और झुंझुनूं के पोंख में हुए नवाचारों की गूंज अमेरिका तक पहुंची है। अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक दल में प्रोफेसर राजेश के. सानी (डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर, मेसन के निदेशक) औरकरेन एम. स्विंडलर (केमिकल एंड बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग विभाग) प्रमुख रूप से शामिल हैं। उनके साथ राजस्थान से जैविक कृषि विशेषज्ञ किसान भंवर सिंह पीलीबंगा और उत्तराखंड प्रदेश पूर्व खेल प्रकोष्ठ के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव थपलियाल भी रहेंगे, जो दल को जैविक खेती पर विस्तृत जानकारी देंगे। दो दिनों तक झुंझुनूं में जैविक खेती का अध्ययन करने के बाद, यह कृषि वैज्ञानिक दल 27 सितंबर, शनिवार को जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेगा। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस होटल गणगौर में दोपहर 3:00 बजे आयोजित की जाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी और राजस्थान में हो रही जैविक खेती के बारे में जानकारी दी जाएगी। वैज्ञानिक राजस्थान में जैविक खेती के अपने अनुभवों और नवाचारों को साझा करेंगे।


