जैसलमेर में आज सरकारी स्कूलों का बहिष्कार:ओरण आंदोलन को लेकर ग्रामीणों का आह्वान, 16 को करेंगे महाआंदोलन

जैसलमेर में ओरण बचाओ टीम द्वारा ओरण गोचर को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन सोमवार को लगातार 21वें दिन भी जारी रहा। जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट परिसर के सामने धरना दे रहे टीम के सदस्यों ने सरकार और प्रशासन की उदासीनता के विरोध में ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों का एक दिवसीय बहिष्कार कराया। ओरण टीम के सुमेरसिंह सांवता ने बताया- उनकी मांगों को लेकर अब तक प्रशासन और सरकार का कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाई दे रहा है। इस नाराजगी के चलते हमने सरकारी स्कूलों के एक दिन के बहिष्कार का आह्वान किया। इस कड़ी में सोमवार को कई गांवों में सरकारी स्कूलों का बहिष्कार किया गया। बच्चों ने स्कूलों के बाहर आकर ग्रामीणों के साथ मिलकर ओरण बचाने को लेकर नारेबाजी की। सरकारी स्कूलों का एक दिवसीय बहिष्कार जैसलमेर में सोमवार को ओरण बचाई टीम द्वारा सरकारी स्कूलों के एक दिन के बहिष्कार के आह्वान पर कई गांवों के ग्रामीणों ने सरकारी स्कूल का बहिष्कार किया। बच्चे स्कूल तो गए मगर स्कूल के अंदर पढ़ने नहीं गए। जिले के खुहड़ी, पोछीना, मोकला, पारेवर, लूणार, भाडली समेत कई गांवों में सोमवार को सरकारी स्कूलों का बहिष्कार किया गया। बच्चों ने स्कूलों के बाहर आकर ग्रामीणों के साथ मिलकर ओरण बचाने को लेकर नारेबाजी की। इनकी मांग है कि जितनी भी ओरण गोचर की जमीन है उनको रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। 16 अक्टूबर को महाआंदोलन की तैयारी सुमेरसिंह ने कहा, “यह बहिष्कार चेतावनी स्वरूप है। हमारी मांग है कि ओरण गोचर को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी, तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे। 16 अक्टूबर को हम महाआंदोलन के लिए तैयारी कर रहे हैं।” इस आंदोलन में ग्रामीणों का समर्थन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर धरने और बहिष्कार के माध्यम से अपनी आवाज उठाई। यह दिखाता है कि ओरण की जमीन और उसका संरक्षण ग्रामीण समुदाय के लिए कितना महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री से नहीं मिला संतोषजनक जवाब इस बीच शनिवार को केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के जैसलमेर दौरे के दौरान ओरण टीम के सदस्यों ने सर्किट हाउस में उनसे मुलाकात की। टीम ने सीधे तौर पर ओरण गोचर को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग रखी। सुमेरसिंह ने बताया कि इस मुलाकात में मंत्री ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। युवा और बुजुर्ग धरना स्थल से नंगे पैर सर्किट हाउस पहुंचे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सुमेर सिंह ने बताया – ओरण बचाने की इस लड़ाई में ग्रामीणों का एकजुट होना और सरकारी स्कूलों के बहिष्कार जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि आंदोलन अब और व्यापक और सशक्त रूप लेने वाला है। प्रशासन और सरकार के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो संघर्ष और तेज होगा। आने वाले दिनों में जोर पकड़ेगा आंदोलन सुमेर सिंह ने बताया – इस तरह के आंदोलन ग्रामीण समुदाय की सामाजिक और पारिस्थितिक जागरूकता का परिचायक हैं। ओरण जैसे प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की भी जिम्मेदारी है। इस आंदोलन ने साबित कर दिया है कि जब समुदाय अपने अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए एकजुट होता है, तो वह किसी भी स्तर पर प्रभाव डाल सकता है। ओरण बचाने के लिए ग्रामीणों की यह लड़ाई आगामी दिनों में और जोर पकड़ने की संभावना है।

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