स्वर्णनगरी जैसलमेर में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिसने इस सीजन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों से आ रही बर्फीली हवाओं के तीखे असर से यहां न्यूनतम तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार की रात इस सीजन की सबसे सर्द रात साबित हुई, जब न्यूनतम तापमान गिरकर पहली बार सिंगल डिजिट यानी 9.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इस अचानक आई गिरावट ने पूरे शहर को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह सिलसिला जारी रह सकता है और तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। अलसुबह व रात को कड़ाके की ठंड बुधवार की सुबह जैसलमेर में हल्का कोहरा छाया रहा, जिससे सड़कों पर दृश्यता कम हो गई और सुबह की चहल-पहल देर से शुरू हुई। ठंड का आलम यह था कि अधिकांश लोग देर तक अपने घरों में ही दुबके रहे। इसका सीधा असर शहर के बाजारों और मुख्य सड़कों पर देखने को मिला, जहां आमतौर पर सुबह से ही काफी रौनक रहती है, वहां आज भीड़ काफी कम रही। सुबह की सैर पर निकलने वाले लोग भी गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को शहर का अधिकतम तापमान 26.7° सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9.5° सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच यह बड़ा अंतर दिन में भी हल्की ठंडक और रात में भीषण सर्दी की स्थिति को दर्शा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह सिलसिला जारी रह सकता है और तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। पशुधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत गिरते तापमान को देखते हुए पशुपालन विभाग ने भी किसानों और पशुपालकों के लिए विशेष एडवायजरी जारी की है। इस कड़ाके की सर्दी में पशुओं में कई तरह के संक्रमण और बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर गलघोंटू (पाश्चूरेल्ला हिमोलाईटिका संक्रमण), एफएमडी (खुरपका-मुंहपका रोग), और पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) मिश्रित संक्रमण का खतरा अधिक होता है। पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए महत्वपूर्ण उपाय: ठंड का यह प्रकोप न सिर्फ मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पशुधन की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रयासों की मांग कर रहा है। प्रशासन और स्थानीय लोग इस अप्रत्याशित शीत लहर से निपटने के लिए आवश्यक प्रबंध कर रहे हैं।


