एमडीएम हॉस्पिटल में बुधवार को नवजातों के बदलने का मामला डीएनए रिपोर्ट आने के साथ सुलझ गया है। डीएनए रिपोर्ट में हॉस्पिटल प्रशासन के दावे पर मुहर लगा दी है कि विमला ने लड़के को जन्म दिया था, ममता के लड़की हुई थी। हॉस्पिटल स्टाफ ने गलती से लड़के के टैग में बेबी ऑफ ममता, सन ऑफ राकेश नागौरा लिख दिया। इससे सारी गफलत हुई। आखिर ये साबित हो गया है कि दोनों माओं के पास उनके ही बच्चे है। इस मामले में अस्पताल के दावे को भास्कर ने पहले ही बता दिया था। पीपाड़ निवासी ममता को 3 दिसंबर को एमडीएमएच की जनाना विंग में भर्ती करवाया गया था। उसके साथ जनाना विंग में खरड़ा रणधीर निवासी विमला भी भर्ती थी। ममता ने बेटी व विमला ने बेटे को जन्म दिया। अस्पताल प्रशासन की ओर से दोनों माओं को सही सूचना दे दी गई। रजिस्टर व टिकट में भी यही सही जानकारी लिखी और दोनों के परिजनों के हस्ताक्षर भी करवा दिए गए। इसके बाद जब विमला के बेटे पर लगाया गए टैग पर गलती से बेबी ऑफ ममता, सन ऑफ राकेश नागौरा लिख दिया गया। जिसकी वजह से वहां मौजूद चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को गलतफहमी हो गई और ममता के परिजनों को बेटा होने की गलत सूचना दे दी गई। परिजनों ने जब ममता के पास बेटी को सोया देखा तो वे भड़क गए और अस्पताल प्रशासन से नोंकझोंक हो गई। वहीं दूसरी ओर विमला के परिजनों ने भी बेटा होने का दावा किया। अस्पताल प्रशासन ने मामले की पुष्टि के लिए दोनों बच्चों व उनके पिताओं की डीएनए जांच करवाई। इस गफलत की जिम्मेदारी तय करने के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी की रिपोर्ट सोमवार तक अस्पताल अधीक्षक को सौंपी जाएगी।


