जोधपुर में शुक्रवार को इनकम टैक्स विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में शहर के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकीलों और ट्रस्टियों ने अपनी पीड़ा जाहिर की। मौका था प्रधान आयकर आयुक्त (छूट) जयपुर द्वारा जोधपुर में ‘पंजीकृत गैर-लाभकारी संगठनों’ (एनजीओ/ट्रस्ट) के लिए आयोजित आउटरीच प्रोग्राम का। इसमें मुख्य मुद्दा ‘व्यावहारिक दिक्कतें’ रहा। पोलिटेक्निकल कॉलेज परिसर में स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के सभागार में हुई इस वर्कशॉप में मुख्य मुद्दा ‘केंद्र बनाम राज्य’ के नियमों का टकराव रहा। सीए, वकीलों और ट्रस्टियों ने साफ कहा कि इनकम टैक्स विभाग (केंद्र) अपनी छूट देने के लिए देवस्थान विभाग (राज्य) का रजिस्ट्रेशन मांग रहा है, जो अव्यावहारिक है। जबकि, कई राज्यों में ऐसी अनिवार्यता नहीं है। वक्ताओं ने कहा कि विभाग छूट देने के बजाय उलझा ज्यादा रहा है। विवाद की जड़: 12A सर्टिफिकेट किसी भी ट्रस्ट को इनकम टैक्स से बचने के लिए ’12A सर्टिफिकेट’ की जरूरत होती है। सीए अजय सोनी ने बताया कि अब इनकम टैक्स विभाग यह सर्टिफिकेट देने या रिन्यू करने के लिए ‘देवस्थान विभाग’ का रजिस्ट्रेशन मांग रहा है। समस्या यह है कि देवस्थान विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण रजिस्ट्रेशन में 6 से 8 महीने लग रहे हैं। इधर, समय पर कागज नहीं मिलने से ट्रस्टों की टैक्स छूट अटकी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट का हवाला: सिर्फ राजस्थान में ही सख्ती क्यों? सीए अमित कोठारी ने कानूनी पक्ष साफ किया। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने कभी नहीं कहा कि देवस्थान का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा था कि यह एक ‘विचारणीय बिंदु’ हो सकता है। अगर कोई संस्था ‘सोसाइटी एक्ट’ या ‘कंपनी एक्ट’ में रजिस्टर्ड है, तो उस पर देवस्थान विभाग का नियम थोपना गलत है।” एडवोकेट राजेंद्र जैन ने सवाल उठाया कि जब कानून पूरे देश में एक है, तो भेदभाव क्यों? उन्होंने कहा, “गुजरात और पंजाब में भी यही इनकम टैक्स एक्ट है, लेकिन वहां राज्य सरकार के रजिस्ट्रेशन (RPT) की जिद नहीं की जाती। यह केवल राजस्थान में हो रहा है।” 70% सवाल बेमतलब के सीए सुरेंद्र चौपड़ा ने विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब कोई नया रजिस्ट्रेशन मांगता है, तो विभाग 50 से 60 बिंदुओं की लंबी प्रश्नावली भेज देता है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 70% सवाल उस ट्रस्ट पर लागू ही नहीं होते। उन्होंने मांग की कि केवल वही जानकारी मांगी जाए जो जरूरी हो, ताकि बेवजह का उत्पीड़न न हो। गरीब की मदद करें या उसका ‘ईमेल’ मांगें? शांतिदेवी मांगीलाल रांका ट्रस्ट के महेंद्र रांका ने एक बहुत ही व्यावहारिक समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत डोनेशन का हिसाब देने के लिए लाभार्थियों की पूरी कुंडली मांगी जा रही है। रांका ने कहा, “अगर हम किसी गरीब बच्चे की स्कूल फीस भरते हैं या उसे किताबें देते हैं, तो सीए हमसे उस बच्चे का ईमेल आईडी मांगते हैं। हम जिन गरीबों की मदद कर रहे हैं, उनके पास न तो स्मार्टफोन है, न ईमेल आईडी। ऐसे नियमों के कारण गौशालाओं और धर्मार्थ कार्यों का अनुदान कम होता जा रहा है।” समाधान की मांग: जोधपुर में लगे कैंप टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सीए राजेंद्र भंडारी ने कहा कि वर्तमान में टैक्स छूट के मामलों में जोधपुर से बार-बार जयपुर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे राहत देने के लिए इनकम टैक्स छूट से जुड़े मामलों के लिए सीआईटी एग्जम्पशन्स की ओर से जोधपुर में ही साप्ताहिक या मासिक कैंप लगाए जाएं। ताकि लोगों का न केवल समय बचेगा, बल्कि अनावश्यक खर्चे से भी राहत मिल सकेगी। रिटर्न फाइलिंग व ऑडिट रिपोर्ट जैसे पहलूओं पर जागरूकता जरूरी आयकर अधिकारी अजय कुमार ने वर्कशॉप आयोजन पर कहा कि जो भी चैरिटेबल ट्रस्ट रिटर्न भरते समय या ऑडिट रिपोर्ट भरने सहित अन्य में जो भी गलतियां करते हैं, उनके बारे में उन्हें जागरूक करने के लिए इस तरह की वर्कशॉप आयोजित की जा रही हैं। संबंधित पक्षकारों को ऐसी गलतियों को सुधारने और उन्हें आ रही समस्याओं को जानने के साथ ही समस्याओं का यथासंभव समाधान करने का प्रयास किया है। इस तरह की चर्चाएं आगे भी जारी रहेंगी।


