भास्कर न्यूज | बालोद ग्राम पसौद में श्रीमद् भागवत कथा के छठवें कथावाचक पंडित निरंजन महाराज ने पंच अध्याय का वर्णन करते हुए कहा कि महारास में वर्णित पंच अध्यायों में गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी भक्त भावपूर्वक ठाकुरजी के इन पंच गीतों का गायन करता है, वह भवसागर से पार हो जाता है और उसे वृंदावन की सहज भक्ति प्राप्त होती है। कथावाचक ने समझाया कि यदि जीव अपने धन का सदुपयोग परमार्थ और ईश्वर सेवा में करता है तो वह धन सुरक्षित रहता है, अन्यथा वह बीमारी, चोरी अथवा अन्य मार्गों से नष्ट हो जाता है। जो व्यक्ति लक्ष्मी-नारायण की पूजा व सेवा करता है, उसे स्वतः ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई।


