ज्ञान, इच्छा और क्रिया शक्ति का समन्वित स्वरूप हैं मां महालक्ष्मी

भास्कर न्यूज | देवरीबंगला ग्राम राघोनवागांव में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण व आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। कथा के पंडित केशव शर्मा छोटे महाराज हैं। कथा के चौथे दिन उन्होंने विष्णु एवं मां लक्ष्मी के दिव्य स्वरूप का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने श्लोक विष्णुपत्नीं च शक्तित्रय स्वरूपिणी… के माध्यम से बताया कि मां महालक्ष्मी इच्छा-शक्ति, ज्ञान-शक्ति और क्रिया-शक्ति का समन्वित स्वरूप हैं। पंडित शर्मा ने कहा कि मां महालक्ष्मी सम्पूर्ण सृष्टि में धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि का संचार करती हैं। वे भगवान विष्णु की अर्धांगिनी होकर सृष्टि के पालन और संतुलन में उनकी दिव्य शक्ति के रूप में कार्य करती हैं। क्षीरसागर से प्रकट होने के कारण उन्हें समुद्रराज की पुत्री कहा जाता है। वे अत्यंत करुणामयी हैं और जो भक्त श्रद्धा, विश्वास एवं पवित्र भाव से उनकी उपासना करता है, उस पर वे शीघ्र प्रसन्न होकर कृपा करती हैं। उन्होंने कहा कि मां लक्ष्मी की कृपा से केवल भौतिक समृद्धि ही नहीं, बल्कि संतोष, शांति और आत्मिक ऐश्वर्य की भी प्राप्ति होती है। ऐसी दयामयी, मंगलमयी एवं सर्वसुखदायिनी मां महालक्ष्मी को कोटि-कोटि नमन है। देवी-देवताओं के अवतारों का वर्णन किया गया कथा के दौरान पं. केशव शर्मा ने यह भी बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेकर अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध और भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध का उदाहरण देते हुए उन्होंने अन्य देवी-देवताओं के अवतारों का भी सुंदर वर्णन किया। व्यासपीठ से उन्होंने वामन अवतार, ध्रुव चरित्र, जड़भरत कथा एवं प्रह्लाद चरित्र की भावपूर्ण कथा सुनाई, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। श्रीमद् भागवत कथा के परीक्षित संगीता नीरज सुधाकर हैं, कथा सप्ताह के प्रमुख यजमान चंद्रप्रभा सुधाकर हैं।

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