झांसी में बुलडोजर से रौंदी सब्जी…महिलाओं का दर्द:गर्भवती बोली- अगले माह डिलेवरी, पैसे जोड़ रही थी, सब्जी न बेची तो बच्चे भूखे मर जाएंगे

“मैं 8 माह की गर्भवती हूं। अगले माह मेरी डिलेवरी होनी है। इसके लिए मैं पैसे जोड़ रही थी। मगर नगर निगम का बुलडोजर आया और मेरी पूरी सब्जी को रौंद गया। मैं रोजाना आढ़ती से सब्जी उधार लेकर आती हूं। सब्जी बिकने के बाद अगले दिन पैसे देती हूं। अब कहां से पैसे चुकाऊंगी। गर्भवती होने के बावजूद सुबह 6 बजे घर से निकलती हूं और रात को 10 बजे घर पहुंचती हूं। अगर सब्जी न बेची तो बच्चे भूखे मर जाएंगे।” ये कहते-कहते राधिका कुशवाहा रोने लगती हैं। इनकी सड़क किनारे लगने वाली दुकान पर नगर निगम ने गुरुवार शाम को बुलडोजर चला दिया। पूरी सब्जी को रौंद डाला। सिर्फ राधिका ही नहीं, ऐसी कई गरीब परिवार की सब्जी को निगम के तानाशाह बुलडोजर ने रौंद डाला। वीडियो वायरल हुआ झांसी ही नहीं, पूरे यूपी में लोग नगर निगम को कोस रहे हैं। अब नगर आयुक्त कह रहे हैं कि उनको जानकारी ही नहीं थी। अतिक्रमण प्रभारी बृजेश वर्मा ने बिना बताए बुलडोजर चलाया है। हालांकि उन पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब पढ़ते हैं, महिलाओं का दर्द गर्भवती हूं, फिर भी 16 घंटे सब्जी बेचती हूं सीपरी बाजार के मसीहागंज की राधिका कुशवाहा ने बताया “नगर निगम हर माह 100 रुपए की रसीद काटता है। लेकिन स्थाई जगह नहीं दे रहे हैं। कम से कम एक डलिया की जगह दे दें, जिससे हम सब्जी बेचकर अपने बच्चे पाल सकें। मेरी 3 बेटियां हैं और मैं 8 माह की प्रेग्नेंट हूं। मेरी अगले महीने डिलेवरी होने वाली हैं। अब मैं ऐसे में कहा जाऊंगी। यह सब्जी है, जिससे मेरा परिवार पल रही है। सुबह आढ़तियों से उधार सब्जी लेकर आती हैं और पूरे दिन सब्जी बेचती हूं। अगले दिन पैसे देकर दोबारा सब्जी लाती हूं। बुलडोजर सारी सब्जी कुचल गया, अब मैं कल कहां से आढ़तियों को पैसे चुकाऊंगी। मेरा 12 हजार का नुकसान है। मैं सुबह 6 बजे घर से निकलती हूं। मंडी से सब्जी लाती हूं और दिनभर सब्जी बेचने के बाद रात को 10 बजे घर पहुंचती हूं। अगर ये सब नहीं करेंगे तो बच्चे भूखे मर जाएंगे। कभी 500 तो कभी 1000 रुपए की इनकम हो पाती है। पति मजदूरी करते हैं। खेतीबाड़ी नहीं हैं। इस हालत में (गर्भवती) कौन बैठ लेगा। मगर मजबूरी है, इसलिए बैठे हैं। अगर सब्जी नहीं बेचेंगे तो रात को भूखा सोना पड़ेगा। बच्चों को भी। हमारा इसी से कमाना धमाना है। पति मजदूरी करते हैं, शराब पीकर उड़ा देते हैं। यही मजबूरी है, इसलिए सब्जी बेचती पड़ रही है।” सब्जी बेचकर लेती हूं आटा-पानी, तब बनता है खाना बरुआसागर की विद्या देवी बताती हैं “हम लोग 20 साल से सब्जी बेच रहे हैं। तब ओवरब्रिज तक नहीं बना था। कल नगर निगम वाले आए और बुलडोजर चलाकर सब्जी को रौंद दिया। हमें सब्जी उठाने तक का समय नहीं दिया। हम लोग हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे, पर वे नहीं माने। आलू, टमाचर, बैगन समेत 10 हजार की सब्जी का नाश कर दिया। हम लोग रो रहे थे तो कह रहे थे कि क्यों रो रहे हो, डंडे मारकर सही कर देंगे। यहां कोई सब्जी नहीं लगने देंगे। हमने उनसे कहा कि हम लोग कहां जाए। गरीब आदमी है। हमारे पास खेतीबाड़ी कुछ नहीं है। इसी से घर चलता है। रोजाना सुबह 4 बजे उठकर मंडी पहुंच जाते हैं और सब्जी खरीदकर रात 10 बजे तक बेचते हैं। यहां से आटा-पानी ले जाते हैं, तब घर पर खाना बनता है। सब्जी बेचकर ही अपने बच्चों को पाल रही हूं। लेकिन गरीबों को सताया जा रहा है।” 20 साल से बेच रही हूं सब्जी, ऐसी सितम नहीं देखा सावत्री देवी ने बताया कि “हमें 20 साल से ऊपर हो गए हैं सब्जी बेचते हुए। कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। कुछ दिनों से नगर निगम वाले बहुत परेशान कर रहे हैं। लेकिन ये नहीं जानते थे कि इस तरह से हम गरीबों की सब्जी को रौंदा जाएगा। 10-10 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। पैसे तक बुलडोजर के सूपा में भरकर ले गए। हम लोगों को न नोटिस दिया गया और न ही कोई अल्टीमेटम दिया गया। हमसे कहते तो हम खुद ही हटा लेते। हम लोग रोकते रहे, मगर 10 मिनट तक बुलडोजर चलता रहा। मेरी चार बेटी हैं और एक बेटा है। उनको कैसे पाले? ये सब्जी बेचकर ही बच्चों को पाल रही हूं। लेकिन ऐसा सितम कभी नहीं देखा।” सब्जी बेचती हूं, तब घर में खाना बनता हैं बरुआसागर की सोना देवी ने बताया कि “हम लोग गरीब आदमी है। सब्जी बेचकर ही बच्चों को पाल रही हूं। मेरी छोटी-छोटी 5 बेटियां हैं, उनको क्या खिलाएंगे। ये सब्जी बेचकर जो कमाती हूं, उससे घर चलता है। पति शराब पीते हैं, इसलिए हमें काम करना पड़ रहा है। ताकि बच्चों को पाल सकूं। शाम को सब्जी बेचकर आटा-पानी लेकर जाते हैं, तब खाना बनता है। मेरी 15 हजार की सब्जी को बुलडोजर से कुचलकर चटनी बना दी। गरीब आदमी क्या करें, कहां जाए? हम चाहते हैं कि हमारे नुकसान की भरपाई की जाए।”

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