झांसी में जेलर कस्तूरी लाल गुप्ता पर प्राण घातक हमला हमीरपुर जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर कमलेश यादव ने ही कराया था। 5 साल से कमलेश झांसी जेल में बंद था। यहां जेलर उसे परेशान करता था। एक माह पहले उसे हमीरपुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया। जेल में मिलने गए दोनों बेटों से उसने कहा था कि जेलर को मार दो। दोनों बेटों ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर घटना की थी। गुरुवार को मुठभेड़ में गोली लगने से घायल बेटे सुमित यादव के बयान के बाद पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर को भी नामजद कर लिया है। उसे हमले की साजिश रचने का आरोपी बनाया गया है। अब उसे वारंट बी के जरिए झांसी लाकर पूछताछ की जाएगी। इधर, दूसरे बेटे अमित समेत तीन आरोपियों की तलाश में पुलिस की छापेमारी जारी है। जेलर को जान से मारने आए थे आरोपी सुमित यादव प्रेमनगर की पुलिया नंबर 9 का रहने वाला है। पुलिस पूछताछ में उसने दाेनों साथियों के नाम भी उगल दिए हैं। दोनों उसके मोहल्ले के अमर सिंह और अशरफ हैं। सुमित ने पुलिस को बताया कि “मेरे पिता काफी समय से झांसी जेल में बंद थे। यहां जेलर आए दिन उनको परेशान करता था। एक माह पहले उनको हमीरपुर जेल में शिफ्ट कर दिया। तब पिता ने जेलर पर हमला करने की साजिश बनाइै थी। मैंने अपने भाई अमित और अपने दो दोस्तों के साथ जेलर और सिपाही का पीछा किया और फिर डीआरएम ऑफिस के पास ऑटो रुकवाकर जान से मारने की नियत से दोनों पर हमला कर दिया था। हमले के बाद चारों अलग-अलग हो गए थे फरार गिरफ्तार आरोपी सुमित यादव ने बताया कि घटना में उसके साथ छोटा भाई अमित यादव और पुलिया नम्बर 9 में रहने वाले अमर सिंह और अशरफ शामिल थे। हमला करने के बाद वह कार से घर गए और घटना की सूचना देने के बाद चारों मोबाइल फोन बंद कर अलग-अलग हो गए। फरारी के दौरान वह मथुरा, दिल्ली और राजस्थान गया था। इसके बाद वह दोस्त से मिलने के लिए पुलिस से छिपते हुए झांसी आया था। गुरुवार शाम को वह सुकुवां-ढुकुवां कॉलोनी के पास जंगल में दोस्त का इंतजार कर रहा था। तभी पुलिस ने दबिश दी। उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जबावी फायरिंग में सुमित के पैर में गोली गली थी। पुलिस ने उससे तमंचा, कारतूस और बिना नंबर की बाइक बरामद की है। सुमित पर 20 हजार रुपए का इनाम रखा गया था। ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जा रहे थे जेलर जेलर कस्तूरी लाल गुप्ता की हैदराबाद में 16 से 20 दिसंबर तक जेल सुधार को लेकर ट्रेनिंग थी। उसमें हिस्सा लेने जेलर 14 दिसंबर को हैदराबाद जा रहे थे। वह ऑटो से स्टेशन जा रहे थे। साथ में जेल वार्डर अर्जुन सिंह भी था। जब उनका ऑटो दोपहर 12.15 बजे डीआरएम ऑफिस के पास पहुंचा, तो सफेद रंग की एक कार ऑटो के आगे आकर खड़ी हो गई। इससे ऑटो रुक गया। कार से हिस्ट्रीशीटर कमलेश यादव के बेटे सुमित यादव और अमित यादव अपने दो साथियों के साथ नीचे उतरे। चारों ने गाली गलौज करते हुए ऑटो से जेलर और जेल वार्डर को बाहर खींच लिया। फिर जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया। हमले के बाद चारों कार से भाग गए। हमले में जेलर का हाथ फ्रैक्चर हो गया था।


