जल जीवन मिशन (हर घर नल-जल योजना) के तहत फरवरी 2024 से लंबित केद्रांश की मांग राज्य सरकार ने केंद्र से की है। इसको लेकर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर. पाटिल से मिले। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को योजना के कार्यान्वयन में आ रही वित्तीय बाधाओं से अवगत कराया। मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि फंड की कमी के कारण जल जीवन मिशन की प्रगति लगभग ठप हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने में संसाधनों की भारी कमी आ रही है। उन्होंने इस विषय में शीघ्र कार्रवाई का केंद्र सरकार से आग्रह किया है। मंत्री प्रसाद ने केंद्रीय मंत्री पाटिल को बताया कि वर्ष 2019 में अनुमानित लागत 24,665.30 करोड़ रुपए के साथ योजना की शुरुआत हुई थी। इसमें केद्रांश 12,257.83 करोड़ रुपए और राज्यांश 12,407.47 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया था। अब तक केंद्र सरकार द्वारा 5,987.46 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, जबकि 6,270.37 करोड़ रुपये अभी लंबित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस योजना के सभी कार्यों में केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन कर रही है। वर्ष 2024-25 के लिए केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के अंतर्गत 2114.16 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया था। परंतु राज्य को अब तक मात्र 70 करोड़ रुपए ही प्राप्त हुए हैं। मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भी आवश्यक राशि जल्द से जल्द जारी करने की केंद्रीय मंत्री से मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य के 62 लाख से अधिक ग्रामीण घरों में नल के माध्यम से जल की आपूर्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 34 लाख से ज्यादा घरों में नल का जल पहुंचाया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 54.85 प्रतिशत है।


