झारखंड तो मिला, लेकिन मूल विषय में हम सबसे निचले पायदान पर : सीएम

अफसरों से कहा- तय समय में काम करें, वरना दंड का भी प्रावधान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि बदलाव कोई जादू की छड़ी नहीं है। राज्य की नीतियों और कानूनों को आमजनों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। सेवा का अधिकार कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें कई बिंदु जोड़े गए हैं। इसका असर मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि समय-सीमा के अंदर काम पूरा करना होगा। अगर अधिकारी समय-सीमा के भीतर काम नहीं करते तो दंड का भी प्रावधान है। सीएम ने कहा कि झारखंड राज्य की परिकल्पना तो पूरी हुई, लेकिन मूल विषय में हम अभी भी सबसे निचले पायदान पर खड़े हैं। म्यूटेशन, जमीन की मापी, चरित्र, जाति, मृत्यु व आय प्रमाण पत्र के लिए आज लोग धक्के खा रहे हैं। अब इसे समय-सीमा के अंदर पूरा करना होगा। झारखंड को सोने की चिड़िया कहा जाता है। लेकिन यह साकार रूप में तभी दिखेगा, जब सवा तीन करोड़ जनता के चेहरे पर मुस्कान दिखेगा। इसमें बड़ी भूमिका विधायिका भी है। इसमें सभी की सकारात्मक भूमिका होनी चाहिए। सीएम शनिवार को झारखंड विधानसभा की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उत्कृष्ट विधायक राज सिन्हा, विधानसभा के छह कर्मचारियों, शहीदों के आश्रितों और खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। -शेष पेज 7 पर विधायक सुनिश्चित करे कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे : राज्यपाल कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि विधानसभा वह पावन स्थल है, जो राज्य के विकास की दिशा निर्धारित करता है। जनता की आकांक्षाओं को स्वर देता है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति को प्रकट करता है। विधानसभा का सत्र केवल बहस का मंच नहीं होता। यह नीति-निर्धारण का मुख्य केंद्र है। जनता की अपेक्षाओं, विश्वास और आशाओं का सजीव प्रतिबिंब भी है। लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए विधायक न केवल राज्य में कानून-निर्माण प्रक्रिया के महत्वपूर्ण अंग होते हैं, बल्कि वे जनता और सरकार के बीच एक सशक्त सेतु की भूमिका भी निभाते हैं। विधायकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विधानसभा की गरिमा बनाए रखना, स्वस्थ और सार्थक बहस करना तथा संविधान की मर्यादाओं का पालन करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का पवित्र कर्तव्य है। राज्यपाल ने कहा कि लोकतंत्र स्वस्थ चर्चा से मजबूत होता है, टकराव से नहीं। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों का उद्देश्य जन-कल्याण और राज्य का विकास होना चाहिए। -शेष पेज 7 पर राज्य निर्माण में शिबू के नेतृत्व में लंबा संघर्ष मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य हमें आंदोलन करके मिला है। जैसे देश के लिए आजादी की लड़ाई लड़ी गई, वैसे ही झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए लड़ाई लड़ी गई। इसमें कई लोगों की शहादत हुई। राज्य निर्माण में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में लंबा संघर्ष हुआ। बिहार से अलग होकर झारखंड हमें मिला। लेकिन इस दौरान हमने कई वीर पुरुष खो दिए। 25 साल में हमारी सरकार ने कई निर्णय लिए हैं। आधी आबादी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। उत्कृष्ट विद्यालय खोले गए। गांव-गांव में पदाधिकारी को भेजा जा रहा है, जिससे लोग जागरूक हो।

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