देश के ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के बढ़ते मामले को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को श्वसन रोगों की निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है। इसके बाद झारखंड के स्वास्थ्य विभाग ने इंफ्लूएंजा व रेस्पिरेट्री निमोनिया का सर्विलांस तेज करने का निर्देश दिया है। इधर हेल्थ सेक्रेटरी अजय कुमार सिंह ने रिम्स निदेशक और राज्य के सभी सिविल सर्जनों के साथ अहम बैठक की। जहां निर्देश देते हुए कहा कि इंफ्लूएंजा और सांस के मरीजों की मॉनिटरिंग करें। जिनका ऑक्सीजन लेवल 80 से नीचे जा रहा है, उन्हें एचएमपीवी संदिग्ध मानें। रिम्स में फिलहाल जांच किट नहीं है, लेकिन दो दिन में उपलब्ध हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर वायरस म्यूटेट होती है तो सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग भी कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी जिले रिम्स को सैंपल भेजें, रिम्स इसे एनआईवी पुणे भेजेगा। झारखंड अलर्ट जरूर पर तैयार नहीं ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) को लेकर झारखंड अलर्ट जरूर हो गया है पर इसकी तैयारी पूरी नहीं है। एक ओर स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर की रहे हैं कि झारखंड किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल का प्रबंधन करने में पूरी तरह सक्षम है। वहीं दूसरी ओर दैनिक भास्कर की पड़ताल बता रही है कि तैयारियों में झारखंड काफी पीछे है। बड़े शहरों के अस्पतालों का हाल रिम्स, रांची : रिम्स में कोरोना के दौरान लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट व पीएसए प्लांट लगाए गए थे। लेकिन ये बंद पड़े हैं। हालांकि पहले से लगे ऑक्सीजन प्लांट काम कर रहे हैं। रिम्स को पीएम केयर से 100 वेंटिलेटर दिए गए थे। इनमें 70 कबाड़ हो चुके हैं। इसी तरह रिम्स में फिलहाल 250 वेंटिलेटर और 100 एचएफएनसी मशीन है। वहीं सदर में 70 वेंटिलेटर है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। आईसीयू बेड की संख्या सीमित है। मरीजों को आम दिनों में भी बेड नहीं मिल पाता। ऐसे में हालात बिगड़े तो मुश्किल हो सकती है। हालांकि दवा और मास्क पर्याप्त मात्रा में है। इसे और बढ़ाया जा रहा है। एमजीएम, जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में आरटी-पीसीआर की व्यवस्था है। यहां 4 ऑक्सीजन प्लांट चालू हालत में है। 2 हजार मरीजों को ऑक्सीजन दिया जा सकता है। टीएमएच, टाटा मोटर्स और ब्रह्मानंद अस्पताल में भी ऑक्सीजन की अच्छी व्यवस्था है। कोविड वार्ड को फ्लू कॉर्नर के रूप में एक्टिवेट करने का आदेश दे दिया गया है। एसएनएमएमसीएच, धनबाद : धनबाद के एसएनएमएमसीएच में कोरोना काल में शुरू की गई आरटी-पीसीआर जांच लैब बंद हैं। आईसीएमआर से लैब का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है। सैंपल जांच के लिए एनआईवी पुणे भेजने की भी व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में कोरोना किट और मास्क भी फिलहाल नहीं है। हालांकि ऑक्सीजन की हालत ठीक है। अब जानिए जिलों का हाल घाटशिला: लंबे समय से खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों को एमजीएम जमशेदपुर रेफर कर दिया जाता है। पलामू: जागरूकता अभियान शुरू कर दिया गया है। लोगों को मास्क पहनने और लक्षण वाले मरीजों को इलाज कराने की सलाह दी जा रही है। रामगढ़: सदर अस्पताल में आरटी-पीसीआर की व्यवस्था है, लेकिन किट नहीं है। बेड है, पर चारों ऑक्सीजन प्लांट बेकार साबित हो रहे हैं। लातेहार: सदर अस्पताल में 12 वेंटिलेटर है। पूरे जिले में 180 ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड तैयार किए जा रहे हैं। 429 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, पीपीई किट, मास्क, ऑक्सीमीटर आदि मौजूद है। लक्षण वाले मरीजों को इलाज कराने और मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। चतरा: अभी तैयारी नहीं है। बुधवार को एडवाइजरी जारी होने के बाद सदर अस्पताल में दो आइसोलेशन सेंटर बनाए जाएंगे। हालांकि आरटी-पीसीआर जांच की व्यवस्था है। हजारीबाग: मेडिकल कॉलेज में आरटी-पीसीआर जांच की व्यवस्था है, पर िकट नहीं है। कोरोना के समय मेडिकल कॉलेज में दो और बरही अनुमंडल अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। ये दो साल से खराब पड़े हैं। एचएमपीवी सबसे हल्का वायरस रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने कहा-गला खराब होने वाले वायरस सात तरह के हैं। इनमें एचएमपीवी सबसे हल्का वायरस है। एंफ्लूएंजा, पाराएंफ्लूएंजा, आरएनए, पारा वायरस फैमली आदि वायरस में सबसे कम औसत एचएमपीवी वायरस का है। इस वायरस से गले में ऊपर ही इंफेक्शन होता है, फेफड़े तक नहीं जाता। मुश्किल से 5 से 16% तक केस में ही निमोनिया होने का खतरा रहता है। पैनिक होने या कोविड जैसा इस वायरस में कुछ भी नही है। हालांकि, जिन्हें इम्यूनिटी की समस्या है, जो दूसरे गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, जिन्हें एस्टोरॉइड की दवा चल रही है, कैंसर की दवा या सेकाई चल रही है उन्हें विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है। क्या कहते हैं हेल्थ मीनिस्टर झारखंड किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल का प्रबंधन करने में पूरी तरह सक्षम है। एचएमपीवी को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है। हर संभावित चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है। हम हर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से लगातार संपर्क में हैं। – डॉ इरफान अंसारी, हेल्थ मिनिस्टर झारखंड


