झारखंड में दूध उत्पादन 25-30% घटा:कड़ाके की ठंड से दुधारू पशु प्रभावित, मकर संक्रांति पर बढ़ेगी दिक्कत

झारखंड में कड़ाके की ठंड का असर अब दुधारू पशुओं पर भी दिख रहा है। पिछले दो-तीन सप्ताह से जारी शीतलहर के कारण दूध उत्पादन में औसतन 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पशुपालकों को नियमित आपूर्ति में कठिनाई हो रही है। वहीं, मकर संक्रांति पर दूध की बढ़ती मांग को पूरा करना चुनौती बन गया है। कोडरमा जिले में भी ठंड का सीधा प्रभाव दूध उत्पादन पर पड़ा है। स्थानीय ग्वाले मोहन यादव ने बताया कि बढ़ती ठंड के कारण पशुओं ने भोजन और पानी का सेवन कम कर दिया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि जो पशु पहले 8 से 10 लीटर दूध देती थीं, वे अब केवल 5 से 7 लीटर दूध ही दे पा रही हैं। ग्राहकों को दूध की आपूर्ति करने में परेशानी दूध उत्पादन में आई इस कमी के कारण मोहन यादव जैसे पशुपालकों को अपने नियमित ग्राहकों को दूध की आपूर्ति करने में परेशानी हो रही है। इसके अतिरिक्त, मकर संक्रांति के कारण दूध की मांग में काफी वृद्धि हुई है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। एक अन्य ग्वाले विक्की यादव ने भी ऐसी ही स्थिति बताई। उनके खटाल में भी पशुओं का दूध उत्पादन घट गया है; जो पशु पहले 8 से 10 लीटर दूध उत्पादन करती थीं, वे अब 4 से 6 लीटर ही दे पा रही हैं। विक्की यादव ने बताया कि वे ठंड से बचाव के लिए गौशाला में आग जलाकर जानवरों को गर्म रखने का प्रयास करते हैं, लेकिन अत्यधिक ठंड के कारण इन प्रयासों के बावजूद उत्पादन में कमी को रोकना मुश्किल हो रहा है। हरा चारा खिलाने से भी उत्पादन में बढ़ोतरी आएगी: जिला पशुपालन पदाधिकारी इधर, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. बिनीता कुमारी ने कहा कि ठंड के कारण दुधारू पशुओं में उत्पादन की कमी तो आती हैं। लेकिन इसके उत्पादन में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने गौ-पालकों से अपील की है कि वे अपने गौशालों में नियमित आग जलाकर पशुओं को ठंड से बचाएं। साथ ही उन्होंने पशुओं के चारे में भी सुधार करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि गौ-पालक अपने पशुओं को नित्य जो खाना खिला रहे हैं, उसमें वे दानों (मकई, गेहूं तथा दलहन) की मात्रा को बढ़ा दें। जिसके लिए वे जानवरों को 4 केजी मकई, 4 केजी गेंहू और 2 केजी दलहन का मिक्सचर बना कर दें। इससे उनके उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। वहीं उन्होंने कहा कि दुधारू पशुओं को बरशिम, नेपियर जैसा हरा चारा खिलाने से भी उनके उत्पादन में बढ़ोतरी आएगी। इसके अलावे उन्होंने नियमित तौर पर पशुओं को मल्टी स्टार एस नामक दवा देने को भी कहा है।

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