झारखंड में भी मंईयां को उद्यम के लिए केंद्र 10 हजार ​दे : राधाकृष्ण

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिहार की तर्ज पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत झारखंड की मंईयां को भी कुटीर उद्योग के लिए 10 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की डाए। साथ ही केंद्र की कोल कंपनियों के पास बकाया 1,36,042 करोड़ का भुगतान शीघ्र कराया जाए। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार के बजट पूर्व विचार-विमर्श के लिए शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड के समग्र विकास के लिए सुझाव के साथ ये मांगें रखीं। वित्त मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 51 लाख मंईयां को प्रतिमाह 2500 रुपए झारखंड सरकार की ओर दिया जा रहा है। राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन के साथ ही उग्रवाद की समस्या भी हमें विरासत में मिली। झारखंड को केंद्र सरकार से कई प्रक्षेत्रों में आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। -शेष पेज 8 पर ऋण सीमा को बढ़ाकर 4% करने की मांग वित्त मंत्री ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कर दर युक्तिकरण के कारण झारखंड को प्रतिवर्ष 4,000 करोड़ रुपए की क्षति हो रही है। इसकी भरपाई केंद्र सरकार करे। इसके साथ ही एफआरबीएम एक्ट के तहत ऋण सीमा को 3% से बढ़ा कर 4% किया जाए। इसके अलावा उग्रवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए अगले पांच वर्षों तक विशेष केंद्रीय सहायता तथा एसआईआर के तहत राशि उपलब्ध कराई जाए। पर्यटन स्थल को विकसित करने में मदद जरूरी वित्त मंत्री ने नेतरहाट, तेनुघाट तथा चांडिल को ईको-टूरिज्म के तौर पर विकसित करने की मांग की। वहीं हुआंगहातू गांव में स्टैच्यू ऑफ स्ट्रेंथ, तोपचांची (धनबाद), मलय (पलामू) में लेक फ्रंट परियोजना का विकास, चतरा में रोप-वे के लिए आ​​र्थिक सहयोग मांगा। नेतरहाट, रांची और रामगढ़ में ग्लास ब्रिज का निर्माण, पतरातू में एक्वेरियम पार्क तथा हीलियम बैलून की उड़ान, बेतला में टाइगर सफारी के साथ मलूटी मंदिर, बैद्यनाथ मंदिर, बंशीधर मंदिर, पारसनाथ, देउड़ी और अंजन धाम को टूरिस्ट कॉरिडोर बनाने के लिए केंद्र से वित्तीय मदद का आग्रह किया। मंत्री ने मजबूती से मांग रखी झारखंड के चार पथों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार 31 हजार 380 करोड़ रुपए की मदद करे। झारखंड की स्थापना के सा​थ राज्य के विकास के लिए जो भी बजट बनाए गए, उसमें गरीब, किसान, मजदूर, महिलाओं, बच्चों, युवाओं के परस्पर विकास का ध्यान रखा गया है। हर वर्ष राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष जो मांगे रखी जाती हैं, वो इसी आधार पर होती हैं। इस बार भी वित्त मंत्री ने उन सभी मांगों को एक बार फिर दोहराते हुए केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखा है।- प्रो. धीरज पाठक, अर्थशास्त्री

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