राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ ने राजस्व अधिकारियों से कहा है कि म्यूटेशन (दाखिल-खरिज) के लिए वे रैयतों को परेशान नहीं करें। समय से म्युटेशन का काम पूरा करें। जिस आवेदन में कमी है, उसे रिजेक्ट करें। मंत्री शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार में विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में सभी 24 जिलों के अपर समाहर्ता शामिल थे। बैठक में मंत्री के सामने विभाग की ओर से म्यूटेशन के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए। बताया गया कि 18 दिसंबर तक राज्य भर में म्यूटेशन 79260 आवेदन लंबित हैं। अब मंत्री इस मुद्दे पर अंचलाधिकारियों व प्रमंडलीय आयुक्तों के साथ जमीन से जुड़े मामलों की समीक्षा करेंगे। विभाग के आंकड़े के अनुसार ऑनलाइन म्यूटेशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद कुल 20 लाख 66 हजार आवेदन आए। इनमें 9.35 लाख आवेदन निष्पादित किए गए। यह कुल आवेदन का 45.25% है। 79.26 हजार आवेदन अभी भी लंबित हैं, जो 3.84 फीसदी है। 10.52 लाख आवेदन को त्रुटियों की वजह से रिजेक्ट किया गया है। रिजेक्शन का यह आंकड़ा कुल आवेदन का 50.92 फीसदी है। बता दें कि म्यूटेशन को लेकर राज्य का आम नागरिक परेशान हैं। सरकार के शीर्ष स्तर के आदेश के बाद भी स्थिति सुधार नहीं रही है। राज्य में बिना आपत्ति के अभी भी लटके हैं म्यूटेशन के 43,517 केस जानकारी के अनुसार बगैर आपत्ति के म्यूटेशन के 43,517 मामले लंबित हैं। इनमें बगैर आपत्ति के 22,588 मामले 30-90 दिनों की अवधि से लटके हैं। 18,771 मामले ऐसे हैं, जो बिना आपत्ति के 90 से 180 दिनों से लंबित हैं। 1633 रैयतों के म्यूटेशन का मामला बिना त्रुटि और आपत्ति के 180 से 360 दिनों से अलग अलग अंचल कार्यालयों में लंबित है। इतना ही नहीं 525 आवेदन ऐसे भी हैं, जो बिना आपत्ति के एक साल से अधिक समय से अंचल कार्यालयों में धूल फांक रहे हैं। रांची, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह, गढ़वा, पलामू और पाकुड़ ऐसे जिले हैं, जहां बिना आपत्ति के सबसे अधिक मामले लंबित हैं। नियमानुसार आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर म्यूटेशन होना चाहिए। अगर कोई आपत्ति हो तो सीओ रैयत को नोटिस जारी कर सकता है। या आवेदन रद्द कर सकता है।


