रांची | जिला स्कूल मैदान में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले के तीसरे दिन रविवार को मेला परिसर में शाम को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की 10 पुस्तकों की शृंखला ‘समय के सवाल’ का लोकार्पण किया गया। वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री बलबीर दत्त बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। मौके पर संवाद कार्यक्रम हुआ। इसमें हरिवंश के साथ प्रो. विनय भरत ने बातचीत की। हरिवंश ने कहा कि किसी भी देश के लिए आर्थिक ताकत के साथ तकनीकी ज्ञान जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिहार झारखंड से आगे बढ़ चुका है। झारखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए संकल्प के साथ नीतियां बनानी होंगी। युवाओं में सृजन की क्षमता विकसित करने की जरूरत है। हरिवंश ने कहा कि झारखंड से अलग होने के बाद बिहार के पास संसाधन नहीं थे, पर वह विकास में आगे निकल गया। झारखंड में तो सभी संभावनाएं हैं। यहां आदिवासी समाज रहता है। आदिवासी समाज की संस्कृति से दुनिया प्रेरणा लेती है। यहां के लोगों में नैतिक ताकत है। झारखंड विकसित राज्य बना तो देश का मॉडल बनेगा, क्योंकि यहां के निवासियों की नैतिक ताकत मजबूत है। हरिवंश ने कहा कि अपने गांव में मैंने भी नीम के पेड़ के नीचे पढ़ना शुरू किया था, जबकि गांव के अनपढ़ लोगों में नैतिकता भरी हुई थी। इसी सीख के साथ जीवन में आगे बढ़ा। उन्होंने कहा कि अपढ़ वे नहीं होते, जो पढ़-लिख नहीं सकते, बल्कि वे हैं जो समय के साथ नहीं चल सकते। भविष्य की परिकल्पना और नई चीजों को सीखना जरूरी है। इनके िबना व्यक्ति सृजनकर्ता नहीं बन सकता। बलबीर दत्त ने कहा कि एक साथ दस किताबों का लोकार्पण ऐतिहासिक है। यह असंभव इसलिए संभव हुआ, क्योंकि हरिवंश खूब लिखते पढ़ते हैं। दत्त ने कहा कि ये किताबें 1977 से 2019 तक पर है। ये चार दशक पत्रकारिता के लिए अहम कालखंड रहे हैं। इस कालखंड में हरिवंश ने जन मुद्दों की पत्रकारिता की, इसलिए इनका लेखन जन इतिहास भी है। प्राध्यापक और अध्येता रविदत्त वाजपेयी ने कहा कि हरिवंश का लेखन रफ वाला हिस्ट्री नहीं, बल्कि समय का प्रामाणिक दस्तावेज है, जिसका हमेशा महत्व है। साहित्यकार महादेव टोप्पो ने कहा कि इन किताबों का महत्व हमेशा बना रहेगा। प्रकाशक हरिशचंद्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार व लेखक अनुज कुमार सिन्हा और सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला भी मौजूद रहीं। ‘समय के सवाल’ शृंखला के तहत दस खंडों में प्रकाशित इन किताबों में देश-दुनिया के विविध विषयों के साथ ही दो विशेष खंड झारखंड पर केंद्रित हैं। प्रशासकों के स्टॉल पर लोगों ने साहित्यिक जुड़ाव का उदाहरण पेश किया। दस किताबों का लोकार्पण ऐतिहासिक : बलबीर दत्त


