झीरम हत्याकांड में करवाया जाए नार्को टेस्ट:कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने आयोग को भेजे दस्तावेज, कई बड़े नेताओं के नाम शामिल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने झीरम नरसंहार वृहद जांच आयोग के चेयरमैन सतीश कुमार अग्निहोत्री और सदस्य गुलाम मिन्हाजुद्दीन को लिखित आवेदन दिल्ली भेजा है। आवेदन के साथ साक्ष्य, दस्तावेज और सबूत भी संलग्न किए गए हैं। विकास तिवारी ने आयोग से स्वयं सहित जेपी नड्डा, विष्णुदेव साय, डॉ. रमन सिंह, किरण देव, भूपेश बघेल, अमित जोगी, कवासी लखमा और ननकी राम कंवर के नार्को टेस्ट के लिए तत्काल समन जारी करने की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि झीरम घाटी हत्याकांड का सच अब देश और छत्तीसगढ़ की जनता के सामने आना चाहिए। इस घटना को 12 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी कई सवाल अनसुलझे हैं। शहीद नेताओं के परिजन भी सच्चाई जानना चाहते हैं। क्या था झीरम घाटी हत्याकांड साल 2013 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने राज्य में परिवर्तन यात्रा शुरू की थी।25 मई 2013 को सुकमा में रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर की ओर रवाना हुआ। काफिले में करीब 25 वाहन और 200 से अधिक नेता-कार्यकर्ता शामिल थे। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा, जहां रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया और हमला हुआ। इस घटना में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शहीद हो गए। पूरी घटना को सुनियोजित बताया गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। सुरक्षा चूक और जांच पर सवाल हमले के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए तत्कालीन BJP सरकार पर सुरक्षा में लापरवाही के आरोप लगाए। वहीं BJP ने इसे नक्सली हमला करार दिया। 27 मई 2013 को मामले की जांच NIA को सौंपी गई। 2014 और 2015 में चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। सुरक्षा चूक की जांच के लिए राज्य सरकार ने न्यायिक आयोग भी गठित किया, जिसकी रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई। बाद में नया आयोग बना, लेकिन हाईकोर्ट से जांच पर रोक लग गई। CBI, SIT और अदालतों तक पहुंचा मामला कांग्रेस नेताओं और वरिष्ठ वकीलों ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए।2016 में CBI जांच का नोटिफिकेशन जारी हुआ, जिसे केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया।2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद SIT गठित की गई, लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते जांच आगे नहीं बढ़ सकी। मई 2020 में साजिश की जांच को लेकर नई FIR दर्ज हुई। मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने NIA की अपील खारिज कर दी, जिससे राज्य पुलिस को जांच का रास्ता साफ हुआ। कांग्रेस का आरोप – सरकार बदलते ही जांच ठप कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समय राज्य में कांग्रेस सरकार थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।पार्टी का आरोप है कि झीरम हत्याकांड की सच्चाई अब भी दबाई जा रही है।

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