झुंझुनूं के अमृत सरोवरों पर सजेगी ‘चौपाल’,:ग्रामीणों को बताए जाएंगे कानूनी अधिकार, 19 से शुरू होगी चौपाल, तैयारियां पूरी

जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 19 जनवरी से 25 जनवरी 2026 तक एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत निर्मित ‘अमृत सरोवरों’ पर ‘चौपाल पर चर्चा’ और ‘सरोवर संवाद’ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होगा। जिला परिषद झुंझुनूं के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक कैलाश चन्द्र यादव ने इस संबंध में सभी विकास अधिकारियों (BDO) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य: विधिक साक्षरता और सशक्तिकरण इस विशेष सप्ताह का प्राथमिक उद्देश्य ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025’ के प्रमुख प्रावधानों से आमजन को रूबरू करवाना है। सरकार की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग, विशेषकर श्रमिक और वंचित वर्ग, अपने कानूनी अधिकारों और अधिनियम के तहत मिलने वाली सुविधाओं के प्रति जागरूक हों। कार्यक्रम की मुख्य गतिविधियां सरोवर संवाद के दौरान निम्नलिखित प्रमुख कार्य किए जाएंगे: सरोवर स्थल पर संवाद: ग्राम पंचायत के अमृत सरोवर पर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में सूचनात्मक सत्र आयोजित होंगे। समावेशी भागीदारी: कार्यक्रम में विशेष रूप से महिला श्रमिकों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और समाज के कमजोर वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। डिजिटल मॉनिटरिंग: पूरे कार्यक्रम की कार्यवाही का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। ‘पंचायत निर्णय ऐप’ के माध्यम से कार्यक्रम की जियो-टैग फोटो और वीडियोग्राफी को वास्तविक समय (Real-time) में अपलोड करना अनिवार्य होगा। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं रहेगी उपस्थित अभियान को सफल बनाने के लिए जिला परिषद ने विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं की उपस्थिति रहेगी। जिला परियोजना प्रबंधक को दी गई है। सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और सहयोगिनियां इन सत्रों में भाग लेंगी। इसकी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग उप निदेशक को दी गई है। विकास अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र की पंचायतों में इन कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन की कमान सौंपी गई है। सीईओ कैलाश चन्द्र यादव ने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025 के प्रावधानों को धरातल पर उतारने के लिए यह संवाद एक सेतु का कार्य करेगा। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी उसके अधिकारों की जानकारी मिल सके।

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