झुंझुनूं में वीरों को सलाम! ‘इच्छामति दिवस’:1971 के युद्ध में इच्छामति नदी पर मिली शानदार जीत की याद, शहीदों वीरांगनाओं का हुआ सम्मान

वीरभूमि झुंझुनूं में 12 राजपुताना राइफल्स (इच्छामति बटालियन) का ‘इच्छामति दिवस’ सोमवार को पूर्ण सैन्य अनुशासन, गरिमा और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। यह दिवस 15 दिसंबर 1971 के भारत-पाक युद्ध में बटालियन द्वारा इच्छामति नदी क्षेत्र में मिली ऐतिहासिक विजय और शहीदों के बलिदान को याद करने ल का दिन है। शहीद स्मारक पार्क में आयोजित भव्य श्रद्धांजलि समारोह में बांग्लादेश मोर्चे पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेजर जनरल पी.एस. राठौड़ रहे, जबकि अध्यक्षता सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन रणजीत सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्नल आज़ाद सिंह बेनीवाल तथा कर्नल राजेश सिंह (सेना मेडल, शौर्य चक्र) उपस्थित रहे। अतिथियों ने झुंझुनूं को वीरों की धरती बताते हुए कहा कि यह भूमि देश को सर्वाधिक शहीद देने का गौरव रखती है। बटालियन के वर्तमान कमांडिंग ऑफिसर कर्नल दिवेश ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि 12 राजपुताना राइफल्स की पहचान उसके शौर्य, अनुशासन और बलिदान से है। उन्होंने जवानों से बटालियन की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। पूर्व कमांडिंग ऑफिसर ने भी बटालियन की वीर गाथाएं साझा करते हुए कहा कि यह इकाई सदैव राष्ट्र रक्षा में अग्रिम पंक्ति में रही है। समारोह के संयोजक हवलदार केशर सिंह थे। आयोजन में उपाध्यक्ष सूबेदार शीशराम तथा सचिव सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन सुभाष चंद्र ने अतिथियों का स्वागत किया। शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित पुष्पांजलि और मौन: समारोह का शुभारंभ शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दो मिनट का मौन रखकर किया गया, जिसके बाद वातावरण भारत माता की जय और वीर शहीद अमर रहें के उद्घोष से देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया। इसलिए मनाया जाता है ‘इच्छामति दिवस’ इच्छामति दिवस 12वीं बटालियन दी राजपूताना राइफल्स के लिए शौर्य और बलिदान का प्रतीक है, जिसे ‘इच्छामति बटालियन’ भी कहा जाता है। यह दिवस हर साल 15 दिसंबर को मनाया जाता है। इसका दिन का महत्व विजय की स्मृति और ‘बैटल ऑनर’ * ऐतिहासिक जीत: यह दिवस 15 दिसंबर, 1971 को हुए बांग्लादेश मुक्ति युद्ध (भारत-पाकिस्तान युद्ध) के दौरान इस बटालियन द्वारा इच्छामति नदी के क्षेत्र में प्राप्त की गई ऐतिहासिक विजय की स्मृति में मनाया जाता है। * वीरतापूर्ण मान्यता: इस निर्णायक जीत के उपलक्ष्य में, बटालियन को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा ‘इच्छामती बैटल ऑनर’ से सम्मानित किया गया था। यह एक वीरतापूर्ण सैन्य मान्यता है, जो 12वीं बटालियन दी राजपूताना राइफल्स के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। युद्ध में क्या हुआ था * यह दिवस उस ऐतिहासिक युद्ध की जीत का प्रमाण है, जहाँ बटालियन ने शेदपुर, रंगपुर और विनाजपुर जैसे तीन प्रमुख पाकिस्तानी ट्रेनिंग सेंटरों से हथियार और गोला-बारूद सहित महत्वपूर्ण सामग्री कब्जे में ली थी। * इस कार्रवाई ने दुश्मन सेना की कमर तोड़ने में और युद्ध में भारत की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शहीदों और वीरांगनाओं का सम्मान इस अवसर पर शहीदों की पत्नियों (वीरांगनाओं) का सम्मान किया गया। प्रोग्राम 12 वीरांगनाओं का सम्मान किया गया। * कमलेश पत्नी स्व० ह० बलबीर सिंह * सुनीता पत्नी स्व० ह० मानसिंह * रजनी देवी पत्नी स्व० ह० आनंद सिंह (SM) * कमला देवी पत्नी हनुमान सिंह * सम्पती देवी पत्नी हुकमार कर्ण सिंह * अनिता देवी पत्नी पवन कुमार * कंचन देवी पत्नी राजेश कुमार * मंजू देवी पत्नी कैलाश चन्द्र * सुनीता देवी पत्नी सुबे० सतीश राव * आरती देवी पत्नी धर्मेन्बर कुमार * मनोज देवी पत्नी सुबे० रामचन्द्र * गुलाब देवी पत्नी छगन सिंह (VRC)

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