झुंडपुरा में ही नहीं और कॉलेजों में भी फर्जीवाड़ा‎:373 कॉलेजों में से सिर्फ 14 में प्राचार्य, फिर भी संबद्धता जारी

शिवशक्ति कॉलेज झुंडपुरा में फर्जी प्रिंसिपल की नियुक्ति का खुलासा होने के बाद जेयू के अफसर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की बजाय खुद को बचाने का रास्ता खोजने में जुट गए हैं। शिवशक्ति कॉलेज झुंडपुरा में प्राचार्य की फर्जी नियुक्ति के बाद जेयू ने 373 निजी कॉलेजों से प्राचार्यों समेत स्टाफ की जानकारी बैंक स्टेटमेंट समेत मांगी, ताकि सामने आ सके कि इन कॉलेजों में कितना स्टाफ तैनात है,​ जिन्हें वेतन दिया जा रहा है। लेकिन जेयू द्वारा जारी 373 नोटिसों के जवाब में सिर्फ 14 कॉलेजों ने ही अपने प्राचार्य व स्टाफ की जानकारी बैंक स्टेटमेंट समेत जेयू को दी। जबकि 359 कॉलेजों ने यह जानकारी नहीं दी। जिसकी सूचना जेयू ने जारी कर दी है। इसके साथ ही 14 कॉलेजों ने ही 31 शिक्षकों को मिलने वाले वेतन की जानकारी दी है। इससे यह तय है कि निजी कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा हो रहा है। इस तरह ऐसे कॉलेजों में पढ़ने वाले लगभग एक लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसे समझें फर्जीवाड़े का गणित
1. जेयू प्रशासन द्वारा हर साल परिनियम 28/17 के तहत निजी कॉलेजों में शिक्षकों व प्राचार्य की नियुक्ति करने के लिए संबद्धता जारी करने से पहले इंटरव्यू कराता है। हर साल निजी कॉलेज प्राचार्य व शिक्षकों के इंटरव्यू एक्सपर्ट कमेटी से होते हैं। लेकिन ज्यादातर कॉलेज, कार्यपरिषद से अनुमोदन नहीं करवाते, क्योंकि इसके बाद ही संबंधित शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति होने की पुष्टि होती है। 2. कॉलेजों को नियुक्ति होने वाले प्राचार्य व शिक्षकों का अनुमोदन कार्यपरिषद से कराने के लिए छह माह समय दिया जाता है। छह माह का सहारा लेकर आधा सत्र ऐसे ही गुजर जाता है। इसके बाद नया सत्र फिर शुरू होता है। इंटरव्यू में जिन प्राचार्य व शिक्षकों का चयन होता है, उनकी ज्वाइनिंग सिर्फ कागजों में होती है। यही कॉलेजों का असली फर्जीवाड़ा है। ऐसे में अब कॉलेजों के द्वारा जानकारी नहीं दी जा रही है। बैंक स्टेटमेंट के बाद ही संबद्धता दी जाएगी जिन 14 निजी कॉलेजों ने बैंक स्टेटमेंट दिया था, उनकी सीनियरिटी लिस्ट जारी कर दी है। कॉलेजों से बैंक स्टेटमेंट के साथ प्राचार्य व शिक्षकों की जानकारी मांगी है जाे कॉलेज जानकारी नहीं देंगे, उन्हें संबद्धता नहीं देंगे। -डॉ. अरुण चौहान, कुलसचिव, जेयू

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