झुलसा रोग दिखने पर रिडोमिल एम जेड 78 का 7 दिन पर दो बार छिड़काव करें

गढ़वा | कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने कहा है कि लानीना के कारण ध्रुवीय पोलर वोर्टेक्स अभी तक कमजोर बना हुआ है। जिससे ठंडी हवाएं अमेरिका, यूरोप होते हुए भारत तक पहुंच रही है। वहीं ठंड का प्रकोप पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। मौसम पूर्वानुमान अनुसार अब कश्मीर, लद्दाख एवं हिमाचल प्रदेश में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के आगे भी बने रहने की उम्मीद है। जिसका असर पंजाब उत्तर प्रदेश होते हुए झारखंड एवं बिहार के मैदानी भागों तक पहुंचता रहेगा। वहीं गलन वाली ठंड बढ़ेगी। धुंध से अभी छुटकारा नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में औसत तापमान गिरेगा। दिन का औसत तापमान 18 से 22 डिग्री और रात का 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। ऐसा मौसम गेहूं एवं जौ जैसी फसलों के लिए अच्छा है। परंतु आलू और सरसों जैसे फसलों के लिए उपयुक्त नहीं होता है। अधिक ठंड की स्थिति में सभी फसलों में नमी बनाए रखें। आलू की फसल में नमी के कमी होने पर झुलसा का प्रकोप बढ़ेगा। अतः झुलसा रोग दिखाई देने पर सिंचाई कर रिडोमिल एम जेड 78 का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर एक सप्ताह के अंतराल पर दो छिड़काव करें। सरसों या अन्य फसलों में लाही के आक्रमण होने पर मेटासीस्टॉक्स 2 ग्राम या डाइमेथियोएट 2 ग्राम या इमिडाक्लोप्रिड 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार एक से दो छिड़काव करें। गेहूं फसल में बुवाई के 20 से 25 दिन के बीच में पहली सिंचाई एवं 45 से 50 दिन के बीच में दूसरी सिंचाई अवश्य कर दें। गेहूं में पहली सिंचाई पर 1.25 किलो एवं दूसरी सिंचाई पर भी 1.25 किलो यूरिया प्रति कट्ठा की दर से डालें। गेहूं में यदि खरपतवार अधिक हो तो निराई गुड़ाई करें या पहली सिंचाई के बाद सल्फोसल्फ्यूरोन 1 ग्राम प्रति 20 लीटर पानी + 2,4 डी 1 ग्राम प्रति लीटर ढ़िकाव करें। आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 8092597083 पर सिर्फ मैसेज करें। डॉ. अशोक कुमार कृषि वैज्ञानिक

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