टिमरनी के किसानों से एसडीएम ने मांगा जवाब:सालों से अप्रभावी सीलिंग एक्ट में थमा दिए नोटिस

कृषि भूमि की जोत की सीमा तय करने के लिए साल 1960 में बना मप्र सीलिंग एक्ट सालों से अप्रभावी रहा है। हालांकि अचानक ही हरदा के टिमरनी में बीते एक हफ्ते में 17 -18 किसानों को इस एक्ट के तहत अतिरिक्त भूमि होने के नोटिस किसानों को दिए गए हैं। प्रशासन ने किसानों से जवाब तलब किया है कि क्यों न उनके पास मौजूद सीमा से अधिक जमीन अतिशेष (सरप्लस) घोषित कर दी जाए। इसके बाद से ही स्थानीय किसानों में नाराजगी है। बीते एक हफ्ते में टिमरनी तहसील के छिदगांव सहित आसपास के गावों में 17 -18 किसानों को टिमरनी एसडीएम कार्यालय से सीलिंग एक्ट के तहत नोटिस मिले हैं। नोटिस में कहा कि राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में इन किसानों के पास सीमा से अधिक जमीन होना पाया गया है। नोटिस में कहा है कि एसडीएम कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब पेश करें। एक्ट में क्या है लिमिट – एक्ट में अलग-अलग श्रेणियों की भूमि के लिए कृषि जोत की अधिकतम सीमा तय की गई है। फसलों और सिंचाई सुविधा के आधार पर 10 एकड़ से लेकर 27 एकड़ तक की सीमा तय है। एकल भूमि मालिक, 5 सदस्यों तक के परिवार और 5 से अधिक सदस्यों के परिवार की अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं। 1960 में एक्ट बनने के बाद सरकार ने अतिरिक्त जमीन भूमि स्वामियों से ली थी। बिना पूरी जानकारी दे दिए थे नोटिस
टिमरनी एसडीएम महेश बड़ोले ने भास्कर से कहा कि अभी नोटिस स्थगित कर दिए हैं। उनका कहना था कि सर्वे के बाद यह जानकारी नहीं आई थी कि संबंधित भू स्वामी एकल है या कुटुंब की किस श्रेणी में है।

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