टीचर के थप्पड़ से स्टूडेंट के कान की नसें डैमेज:सुनने की क्षमता 80% कम हुई, हर 4 दिन में ऑक्सीजन-थेरेपी, परिजन बोले-खर्च उठाए स्कूल

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में टीचर के थप्पड़ से छात्र के कान 80% तक डैमेज हो गए हैं। मामला डोंगरगढ़ के खालसा पब्लिक स्कूल का है। किताब निकालने में देरी होने पर टीचर ने 7वीं के स्टूडेंट को एक के बाद एक 4 थप्पड़ जड़ दिए। छात्र के दोनों कानों की नसें डैमेज हो गई, जिससे उसे कम सुनाई दे रहा है। इधर, परिजनों की शिकायत पर स्कूल ने टीचर प्रियंका सिंह को सस्पेंड कर दिया है। पीड़ित छात्र सार्थक सहारे (13) के पिता सुधाकर सहारे ने बताया कि सार्थक की सुनने की क्षमता अब 76.6 dBHL तक पहुंच गई है। यह गंभीर हियरिंग लॉस की स्थिति है। इलाज के लिए रोजाना 2500 रुपए खर्च हो रहे हैं। हर 4 दिन में रायपुर में ऑक्सीजन थेरेपी करानी पड़ रही है। स्कूल प्रबंधन और पेरेंट्स संघ की हुई बैठक बुधवार को डोंगरगढ़ के खालसा पब्लिक स्कूल में स्कूल प्रबंधन और अभिभावक संघ की बैठक में हुई। इस बैठक में पीड़ित बच्चे के परिजन ने बच्चे को थप्पड़ मारने वाली स्कूल टीचर प्रियंका सिंह को नौकरी से बर्खास्त करने और स्कूल प्रबंधन से बच्चे के इलाज के खर्च की मांग की है। हरजीत सिंह अरोरा ने बताया कि मामला सामने आने के बाद टीचर को कारण बताओ नोटिस देने के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। फिलहाल, राजनांदगांव शिक्षा विभाग की ओर से एक समिति मामले की जांच कर रही है, जो भी समिति की रिपोर्ट में सामने आएगा, उस आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। वहीं बच्चे के बेहतर इलाज के लिए स्कूल प्रबंधन परिजनों के साथ खड़ा है। क्या कहते हैं डॉक्टर रायपुर के डॉ. अनुज जाऊलकर ने कहा, सार्थक सहारे को स्कूल में टीचर द्वारा थप्पड़ मारने के बाद दोनों कानों से सुनाई कम दे रहा है। जांच में कान की नसों में चोट (Post-traumatic Sensorineural Hearing Loss) पाई गई, जिससे सुनने की शक्ति 76 dBHL पर पहुंच गई है। यह सुनने की क्षमता में मध्यम से गंभीर कमी मानी जाती है। डॉ. अनुज ने बताया कि हमने इलाज में ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) और कान में स्टेरॉयड डालकर इलाज शुरू करने की सलाह दी है, ताकि नसों की कार्य क्षमता वापस लाई जा सके। समय पर इलाज बहुत जरूरी है ताकि सुनने की क्षमता बचाई जा सके। जानिए क्या है पूरा मामला? दरअसल, 2 जुलाई को हमेशा की तरह कक्षा 7वीं का छात्र सार्थक सहारे (13) स्कूल गया था। इस दौरान सामाजिक विज्ञान की टीचर प्रियंका सिंह क्लास लेने के लिए आई। टीचर ने छात्र सार्थक को किताब निकालने के लिए कहा, लेकिन थोड़ी देरी हो गई। छात्र ने टीचर से दोबारा पूछा कि मैम आपने क्या कहा है, मैं सुन नहीं पाया हूं। इससे टीचर गुस्से से तमतमा उठीं और 3-4 थप्पड़ मार दिए। थप्पड़ से आई गंभीर चोट, छात्र को सुनाई देना हुआ बंद सार्थक की मां संतोषी सहारे ने बताया कि उनका बेटा स्कूल से घर लौटते ही बोला कि मम्मी, मुझे अब सुनाई नहीं दे रहा। घबराए परिजन तत्काल उसे डोंगरगढ़ के सरकारी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर्स ने प्रारंभिक जांच में बताया कि छात्र के कान में अंदरूनी चोट आई है। इसके बाद डॉक्टर्स ने सार्थक को राजनांदगांव जिला अस्पताल, फिर रायपुर के निजी अस्पताल में रेफर किया। रायपुर के निजी अस्पताल के मुताबिक, चोट गहरी है। इलाज लंबा चल सकता है। अभी भी छात्र को सुनने में तकलीफ है। ​​​​​ ​शिक्षिका पहले भी छात्रों को पीट चुकी परिवार की शिकायत के समर्थन में एक अन्य छात्र की मां श्वेता गजभिए ने कहा कि टीचर प्रियंका सिंह पहले भी कई छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार कर चुकी हैं, लेकिन बच्चे डर की वजह से चुप रहते हैं। श्वेता के अनुसार टीचर बच्चों से चिल्लाकर बात करती हैं और मारने में संकोच नहीं करतीं। हमारे बच्चे को न्याय मिले- परिजन छात्र की मां संतोषी सहारे ने कहा कि हम बस चाहते हैं कि हमारे बच्चे को न्याय मिले। स्कूल टीचर को बर्खास्त किया जाए। बच्चे के इलाज का खर्च स्कूल उठाए। यह कोई मामूली सजा नहीं थी, बल्कि हमारे बच्चे की जिंदगी पर हमला है। ………………………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… महिला टीचर ने छात्र को जड़े थप्पड़…80% कान डैमेज:रायपुर के निजी अस्पताल में चल रहा इलाज, रायगढ़ में भी नर्सरी के छात्र की पिटाई छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में सातवीं कक्षा के छात्र को पीटा गया है। महिला टीचर ने समय पर किताब न निकाल पाने पर छात्र को एक के बाद एक चार जोरदार थप्पड़ जड़ दिए, जिससे उसके कानों में गंभीर चोट पहुंची। वह सुन नहीं पा रहा है। मामला डोंगरगढ़ के खालसा पब्लिक स्कूल का है। पढ़ें पूरी खबर…

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