उरीमारी में सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र की न्यू बिरसा परियोजना के कोयला डिपो में तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के उग्रवादियों ने उत्पात मचाया। 7-8 उग्रवादियों ने कोयला डिपो में खड़ी एक जेसीबी में पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी, जबकि दो पेलोडर मशीन व तीन हाइवा में तोड़फोड़ की। इस दौरान पांच राउंड फायरिंग भी की गई। सीसीएल कर्मी संतोष मुंडा के दाहिने पैर में गोली लगी है। घायल कर्मी को सीसीएल गांधीनगर अस्पताल रांची भेजा गया है। वहां डॉक्टरों ने गोली निकाल दी है। घटना बुधवार रात करीब 11.30 बजे की है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत है। भय से न्यू बिरसा परियोजना में लोडिंग और कोयला ढुलाई का काम 10 घंटे तक ठप रहा। जो मशीन जली है उसकी कीमत करीब 60 लाख रुपए बताई जा रही है। यह विस्थापित नेता संजय करमाली की है। टीपीसी उग्रवादियों ने घटना की जिम्मेवारी लेते हुए एक पर्चा छोड़ा है। इसमें किसी प्रताप जी का हवाला देते हुए कहा गया है कि काम नहीं करने की चेतावनी दी गई है। ऐसा न करने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई है। गिरिडीह में अपराधियों ने मुंशी समेत 5 मजदूरों को पीटा, 5 लाख रंगदारी मांगी गिरिडीह के गावां में हथियारबंद अपराधियों ने बुधवार देर रात छोटनर नदी के पुल निर्माण स्थल पर मुंशी और मजदूरों पर हमला कर दिया। मुंशी बासुदेव यादव के अनुसार, चार बाइक पर सवार 15 अपराधी आए थे। इनमें तीन के पास बंदूकें थी। अन्य अपराधियों ने रॉड और लाठियां ले रखा था। अपराधियों ने आते ही मुंशी और मजदूरों से मारपीट शुरू कर दी। अपराधी ठेकेदार से 5 लाख रुपए रंगदारी मांग रहे थे। घायल मुंशी का इलाज गावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया। गावां थानेदार अभिषेक कुमार सिंह ने घटना की पुष्टि की है। पुलिस ने 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया: उरीमारी पुलिस ने रांची के हेंदेगीर-छापर से 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ जारी है। बड़कागांव एसडीपीओ पवन कुमार ने कहा है कि न्यू बिरसा परियोजना के कोल डिपो में फायरिंग व आगजनी की घटना हुई है। टीपीसी उग्रवादियों ने जिम्मेवारी ली है। पुलिस आपराधिक इतिहास रखने वाले कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। जल्द ही पूरे मामले का पर्दाफाश हो जाएगा। त्रिपक्षीय वार्ता के बाद काम शुरू, पुलिस पिकेट बनाने पर सहमति घटना के बाद कर्मचारी सुरक्षा को लेकर डरे हुए थे। इस मुद्दे पर कोयला डिपो में सीसीएल प्रबंधन, पुलिस-प्रशासन और विस्थापित लोगों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। इसमें परियोजना क्षेत्र में पुलिस पिकेट बनाने, कोल डिपो में विस्थापित व कर्मियों के बैठने के लिए कार्यालय, डिपो सहित मुख्य चौक-चौराहे पर सीसीटीवी कैमरा लगाने, पेयजल की व्यवस्था, पानी टंकी बनाने सहित बरका-सयाल क्षेत्र की अन्य परियोजनाओं में लगे सीसीटीवी कैमरे को दुरुस्त कर इसे उरीमारी ओपी से कनेक्ट करने की सहमति बनी। सहमति बनने के बाद पुलिस की निगरानी में 10 घंटे बाद कोयले की लोडिंग व ढुलाई शुरू हुई।


