भाजपा की भजनलाल सरकार एक साल पूरे करने पर आयोजन कर रही है। जनता इस इंतजार में है कि बीकानेर की टूटी सड़कें कब बनेंगी। आखिर मेयर, सांसद, सात में से छह विधायक अधिकारियों की इस लापरवाही पर सवाल क्यों नहीं उठाते। नगर विकास न्यास के पास पूरे शहर में 299 किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। इसमें से 279.29 किलोमीटर सड़कें डामर की हैं। मानसून सीजन में 110 किलोमीटर लाइबिलिटी और करीब 100 किलोमीटर दूसरी सड़कें टूटकर जर्जर हो गई हैं। मानसून सीजन बीते हुए तीन माह बीच गए। अब तापमान 7 डिग्री पर आ गया और डामर का काम होगा नहीं। अगर फरवरी में काम शुरू कराया भी जाता है तो पूरा होने में समय लगेगा ही। यानी जब तक यूआईटी काम खत्म कराएगी तब तक वापस मानसून आ जाएगा। यूआईटी की इस कार्यप्रणाली से जनता अब सत्ताधारी नेताओं से नाराज है। दरअसल मानसून सीजन में बीकानेर की सबसे बड़ी समस्या ही टूटी सड़कें थी। पीडब्ल्यूडी के पास 312 किलोमीटर सड़कें टूटी थीं जिनकी मरम्मत समय पर इसलिए करा ली गई क्योंकि उन्होंने उसके टेंडर मानसून सीजन में ही कर दिए थे। मानसून खत्म होते ही काम शुरू हो गया। नगर निगम ने सिर्फ सर्वे कराया और सामने आया कि 1061 सड़कें-गलियां जर्जर हो चुकी हैं। निगम के पास उनको ठीक कराने को पर्याप्त बजट ही नहीं है। निगम के पास सिर्फ एक करोड़ का बजट है। उसमें सिर्फ 12 किलोमीटर सड़क बन सकी। नगर विकास न्यास के पास ज्यादातर पॉश कॉलोनियां हैं। पॉश इसलिए कहा जाता है क्योंकि वहां यूआईटी की स्कीम होती है। मगर इस बार यूआईटी जितना सुस्त कोई विभाग नहीं। पिछले मानसून में टूटी सड़कें आने वाले मानसून तक ही बन पाएंगी। चिंता की बात ये है कि आने वाले मानसून में भी ये सड़कें टिक पाएंगी कहना मुश्किल है। यूआईटी की कार्यप्रणाली के कारण आए दिन बीकानेर पूर्व की विधायक और पश्चिम विधायक को जनता की खरी-खरी सुननी पड़ रही है। यह तब है जब बीकानेर ने मेयर, सांसद, 7 में से 6 विधायक भाजपा को दिए लेकिन सबसे बुरे हालात भाजपा के पहले शासन काल में सड़कों के हैं। विधायक-सांसद महोदय… क्या इस गति से आप संतुष्ट हैं जनता सवाल सांसद और विधायकों से कर रही है कि मानसून सीजन में जो सड़कें टूटी थी। उनके दिसंबर तक टेंडर-वर्क आर्डर नहीं हो पाए। व्यास कॉलोनी वाली सड़क जहां केन्द्रीय कानूनी मंत्री, विधायक खाजूवाला, दो पूर्व कैबिनेट मंत्री रहते हैं। उस सड़क का अब तक सिर्फ एस्टीमेट ही बन पाया। जनता का सवाल है कि क्या यूआईटी की इस गति से आप संतुष्ट हैं। अगर नहीं, तो अब तक यूआईटी से जवाब-तलब क्यों नहीं किया गया कि पिछले मानसून की सड़कों की मरम्मत अगले मानसून तक क्यों होगी। 110 किमी लाइबिलिटी की सड़कों का काम भी अधूरा यूआईटी के पास 110 किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं जो लाइबिलिटी की हैं। यानी अभी गारंटी पीरियड में हैं। इनका निर्माण कुछ ही साल पहले ही हुआ। मगर सड़क अब तक ठीक नहीं कराई गईं। पीडब्ल्यूडी की लाइबिलिटी की सड़कें पूरी ठीक नहीं हुई। पुरानी गिन्नाणी माताजी मंदिर के पास एक साल पहले ही सड़क बनी थी लेकिन सड़क जर्जर है। कलेक्टर कहकर थक गई लेकिन ठेकेदारों पर जूं तक नहीं रेंगी क्योंकि ठेकेदारों को अभियंताओं का संरक्षण है। यही हालात यूआईटी में है। ठेकेदारों को अभियंताओं का इतना मजबूत संरक्षण मिला हुआ है कि उन्हें किसी अधिकारी की चिंता नहीं। यूआईटी की 110 किमी में से करीब 60 किमी में ही पैचवर्क कराया गया। इन सड़कों का वर्क आर्डर जारी होना है इन सड़कों के टेंडर हुए वेतन ले रहे पर जिम्मेदारी और जवाबदेही की कमी सड़कें पहले से कौन सी टूटी थी और मानसून में और कितनी टूटीं ये अभियंताओं को याद होना चाहिए। मानसून बीते 4 महीने हो गए और आज तक एस्टीमेट ही बन रहा। ऐसा हो क्यों रहा है। मैं भी सरकार में रहा। मेरे समय में भी मानसून सीजन में पैचवर्क और नई सड़कों के टेंडर हुए थे। बारिश बंद होते ही काम चालू हो गए। ये यूआईटी ने क्यों नहीं किया। आप वेतन ले रहे हो तो जनता के प्रति जिम्मेदारी भी समझनी होगी। सच ये है कि जिम्मेदारी बडे अधिकारी ही तय नहीं करते। अगर बड़े अधिकारी आज जिम्मेदारी तय कर दें तो कल ये काम हो जाएगा। जवाबदेही तय करके जिम्मेदारी दी जाए फिर देखो काम होता है या नहीं। क्यों नहीं उन लोगों से जवाब-तलब किया जाता। आप लाखों रुपए की सैलरी ले रहे और जनता बारिश बंद होने के 4 महीने बाद भी टूटी सड़कों पर चलने को मजबूर है। अब तो फरवरी तक कोई सड़क नहीं बन सकती बनाई तो वो ज्यादा दिन चलेगी नहीं। एक ही रास्ता शेष है कि जब मौसम कुछ ठीक हो तो सड़कों की मरम्मत का काम कराया जाए।- नरेश जोशी – सेवानिवृत्त एक्सईएन पीडब्ल्यूडी टेंडर-वर्कआर्डर हो रहे हैं। तापमान का ख्याल रखते हुए काम कराने की कोशिश करेंगे। अगर टेंपरेचर का साथ मिला तो अभी काम शुरू करा देंगे।
अर्पणा गुप्ता, यूआईटी सचिव


