सात साल से नियमावली की वाट जोह रही झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) के लिए सुखद खबर है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके सिंह के मुताबिक जेयूटी की नियमावली के लिए सरकार के वित्त और विधि विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है। अब झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में स्वीकृति के लिए नियमावली भेजी गई है। जेपीएससी से स्वीकृति मिलने के बाद सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। इसी के साथ विवि में सृजित सभी 91 पदों पर नियुक्ति का रास्ता भी साफ हो जाएगा। नियमावली नहीं बनने के कारण कुलपति को छोड़ किसी बड़े पद पर स्थाई नियुक्ति नहीं हो पा रही थी। इसका सीधा असर एकेडमिक और प्रशासनिक कार्यों पर भी पड़ रहा था। उल्लेखनीय है कि राज्य में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम-2011 के तहत जेयूटी की स्थापना नामकुम में 2015 में की गई थी। तीन साल बाद 2018 में शैक्षणिक सत्र भी शुरू हो गया। लेकिन विवि अधिनियम के अनुसार नियमावली नहीं बनने के कारण टेक्निकल यूनिवर्सिटी आज तक प्रभार में ही चल रही है। रिसर्च हो रही है प्रभावितविश्वविद्यालय की पहचान रिसर्च से होती है। लेकिन जेयूटी में स्थाई फैकल्टी की नियुक्ति नहीं होने के कारण रिसर्च प्रभावित हो रही है। नियम के अनुसार स्थाई शिक्षक ही अपने अंतर्गत पीएचडी करा सकते हैं। अभी तीन विषयों की पढ़ाईजेयूटी में अभी कंप्यूटर साइंस के अंतर्गत के डेटा साइंस , मेकेनिकल इंजीनियरिंग के अंतर्गत प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग और सिविल इंजीनियरिंग के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग की पढ़ाई हो रही है। जेयूटी में ये पद हैं सृजित… जेयूटी के सृजित पदों में वीसी, रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार, फाइनेंस अफसर, परीक्षा नियंत्रक, निदेशक करिकुलम डेवलपमेंट, सहायक परीक्षा नियंत्रक, वीसी का पीएस, रजिस्ट्रार का पीए, फाइनेंस अफसर का पीए, परीक्षा नियंत्रक का पीए, प्रशाखा पदाधिकारी, लाइब्रेरियन, सहायक लाइब्रेरियन, संपदा पदाधिकरी, सहायक निदेशक फिजिकल एजुकेशन, पांच विभागों के लिए पांच प्रोफेसर, आठ एसोसिएट प्रोफेसर, 15 असिस्टेंट प्रोफेसर, 12 टेक्निकल अफसर, 12 लैब असिस्टेंट, पांच स्टोर कीपर और एलडीसी स्टॉफ शामिल है।


