गाय को राज्य माता घोषित करने समेत अन्य की मांग को लेकर सोमवार को गौ सेवक सड़कों पर उतर गए। गोसेवकों ने टोंक में कलेक्ट्रेट कर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
साथ ही कहा कि गौमाता को राज्य माता का दर्जा नहीं दिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। यह प्रदर्शन राजस्थान गोसेवा समिति जिला शाखा टोंक के तत्वावधान में समिति जिलाध्यक्ष रामकिशन काल्हया के नेतृत्व में किया गया। समिति जिलाध्यक्ष रामकिशन काहल्या ने बताया कि गौ-माता को सरकारी आश्रय की जरूरत है। इसके लिए सरकार उसे राज्य गोमाता का दर्जा दे। ताकि उसे और सुरक्षित रखने और अच्छे से पालन पोषण को लेकर सुविधा बढ़ सके। ज्ञापन देने वालों में गौ-सेवक रोहिताश कुमावत, सुरेश विजय, इन्द्रजीत सिंह, राकेश चौधरी, कुशल सैनी, मोनू गुर्जर, जगदीश भोपा, जानकी देवी, मनोहर देवी विजय, बजरंग लाल यादव, सत्यनारायण सोनी, अशोक छाबड़ा, जगदीश भोपा, हनुमान भोपा, नवरतन, महावीर, प्रकाश, धर्म सिंह, गोविन्द गुप्ता, पोखर सैनी आदि मौजूद थे। यह है प्रमुख मांगें
सीएम को भेजे ज्ञापन में सरकार से तीन प्रमुख मांग रखी है। इसमें गौ-माता को राज्य माता घोषित करने, पंजीकृत गौ-शालाओं में संरक्षित गौ-वंश को 12 माह के लिए सहायता राशि देने, प्रदेश में घोषित गोचर, चारागाह, वन, पहाड़ों की भूमियों को गौ-वंश के चरने-विचरने के लिए सुरक्षित रखने की मांग की है।
गोसेवकों बताया कि इन मांगों पर तत्काल आदेश पारित कराए। जल्द इसके आदेश जारी नहीं होता है तो गोशाला संचालकों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा


