अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को सत्ता में आए 194 दिन ही हुए हैं, लेकिन उनका यह कार्यकाल उथल-पुथल और यू-टर्न से भरा नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा अस्थिरता टैरिफ नीतियों में दिखी है। अब तक ट्रम्प टैरिफ से जुड़े 28 फैसलों पर यू-टर्न ले चुके हैं। ट्रम्प प्रशासन ने अब तक रिकॉर्ड 178 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किए हैं, यानी हर एक दिन लगभग एक नया आदेश दिया है। इनमें से 34 फैसले ऐसे हैं जो खुद ट्रम्प ने पलटे हैं। उदाहरण के तौर पर, रिसर्च फंडिंग पर रोक के आदेश को महज 3 दिन में ही पलटा गया। गैस और ऊर्जा क्षेत्र में दी गई राहतों को वापस लेने के फैसले पर भी दो हफ्ते बाद यू-टर्न ले लिया। अवैध प्रवासियों पर क्रैकडाउन से लेकर, टैरिफ और LGBTQ के अधिकारों तक, ट्रम्प ने अपने आदेशों से कई बार यू-टर्न लिया है। ट्रम्प के यू-टर्न के चलते सबसे ज्यादा भ्रम इंडस्ट्री वर्ल्ड में है। अमेरिकी अदालतों पर कानून विरोध का दबाव बढ़ा इन फैसलों की तेजी और विरोधाभास का नतीजा यह है कि अदालतों में ट्रम्प प्रशासन के आदेशों के खिलाफ केस की बाढ़ आ गई है। अमेरिका की संघीय अदालतों पर अचानक फैसला-पलटने और कानूनी विरोध का दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प ने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के नाम पर जो फैसले लिए, उन पर यू-टर्न लेकर प्रशासन को उलझन और जनता को भ्रम की स्थिति में डाल दिया है। ट्रम्प प्रशासन के 200 से ज्यादा आदेशों पर कोर्ट स्टे लगा चुका ट्रम्प के बिना सोचे-समझे लिए फैसलों पर कोर्ट भी सख्त है। कोर्ट अब तक ट्रम्प प्रशासन के आदेशों के खिलाफ दायर याचिकाओं में 200 से ज्यादा मामलों पर स्टे लगा चुका है। इनमें से अधिकांश केस में संघीय अदालतों ने हस्तक्षेप कर नीतियों को असंवैधानिक या जल्दबाजी में लिया गया पाया। उदाहरण के तौर पर बर्थ-राइट सिटिजनशिप को समाप्त करने की कोशिश पर कई फेडरल जजों ने तत्काल रोक लगा दी। इसे 14वें संशोधन के उल्लंघन के रूप में रोका। एक जज ने इक्विटी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स के रद्द करने पर रोक लगाई। ट्रम्प द्वारा नियुक्त जजों ने भी कई मामलों में रोक लगाई। डिपोर्टेशन, यूक्रेन और गाजा युद्ध जैसे मुद्दों पर भी बार-बार अपने दावों से पलटे


