ट्रेन के कोच के नीचे बैठकर 250 किमी आया युवक:जांच के बीच डिब्बे के नीचे मिला; वजह पूछने पर कहा, टिकट के पैसे नहीं थे

इटारसी से जबलपुर तक 250 किलोमीटर की दूरी एक युवक ने ट्रेन के पहिए के पास बैठकर तय की। घटना गुरुवार शाम की है, जब दानापुर एक्सप्रेस जबलपुर स्टेशन के आउटर पर पहुंची। ट्रेन की नियमित जांच के दौरान रेलवे कर्मचारियों को एस-4 कोच के नीचे छिपा हुआ युवक मिला। रेलवे कर्मचारी जब एस-4 कोच के पास जांच कर रहे थे, तो उनकी नजर कोच के नीचे लेटे एक व्यक्ति पर पड़ी। उन्होंने तुरंत वायरलेस के जरिए लोको पायलट को सूचना दी और ट्रेन रुकवाई गई। इसके बाद कर्मचारियों ने ट्रॉली में छिपे उस व्यक्ति को बाहर निकाला। कौन है ये युवक पता नहीं ट्रेन के पहिए के पास छिपकर इटारसी से जबलपुर तक सही सलामत पहुंचे इस युवक को जिसने भी देखा, हैरान रह गया। मौके पर मौजूद रेल कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर करीब 250 किलोमीटर का सफर तय करने वाले इस व्यक्ति को पकड़कर वैगन विभाग (एसीएंडडब्ल्यू) के सुपुर्द कर दिया। रेल कर्मचारियों ने उससे सफर के बारे में पूछा, तो उसने बिना डरे बताया कि उसके पास टिकट खरीदने के पैसे नहीं थे, इसलिए उसने यह खतरनाक तरीका अपनाया। युवक ने बताया कि वह दानापुर एक्सप्रेस के एस-4 कोच के नीचे पहिए के पास बैठकर बिना किसी डर के सफर करता रहा। रोलिंग परीक्षण करने वाले एक रेल कर्मचारी ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार उसे पहिए के बीच में देखा, तो उनके होश उड़ गए। इस घटना की जानकारी तुरंत रेलवे अधिकारियों को दी गई। रेल कर्मचारी ने जांच के बीच कोच के नीचे देखी हलचल गुरुवार की शाम इटारसी से जबलपुर आने वाली दानापुर एक्सप्रेस ट्रेन की जांच के दौरान रेल कर्मचारियों ने पहिए के बीच में हलचल देखी। जब वे कोच के नीचे गए, तो देखा कि एक युवक वहां छिपा हुआ है। कैरिज एंड वैगन विभाग (एसीएंडडब्ल्यू) के कर्मचारियों ने तुरंत उसे पकड़ लिया। इस घटना ने रेलवे के अधिकारियों को भी चिंता में डाल दिया। उनका कहना है कि अगर कोई अनहोनी हो जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने कहा कि युवक कौन है और कहां का रहने वाला है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। मामले की जांच आरपीएफ पुलिस को सौंपी गई है। रेलवे प्रबंधन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और इसे चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि यह घटना उन लोगों के लिए एक सबक है, जो जान जोखिम में डालकर ऐसे खतरनाक सफर करने की कोशिश करते हैं।

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