ट्रैकिंग के दौरान दीवार कूदकर टाइगर सामने आया:सरिस्का की महिला रक्षक बोलीं- हमले के मूड में था, डटी रही; सांभर के शावकों को बच्चों की तरह पाला

सरिस्का व रणथम्भौर में ऐसी 95 महिला वन रक्षक हैं। महिला रक्षकों को ड्यूटी के दौरान कई चुनौती ऐसी आई, जब इनकी जान पर बन आई। कई महिला रक्षकों के सामने ट्रैकिंग के दौरान टाइगर सामने आ गए। डर के बाद भी ड्यूटी पर डटी रही। महिला दिवस पर हमने सरिस्का की ऐसी ही महिला वन रक्षकों से बात की।
उन्होंने क्या कहा, पढ़िए… दीवार कूदकर सामने आ गया था टाइगर सरिस्का की महिला वन रक्ष सीमा चौधरी ने बताया- वे पहले रणथम्भौर में थी। रणथम्भौर में ट्रैकिंग के दौरान अचानक दीवार कूदकर टाइगर उनके सामने आ गया था। केवल 30 फीट के रोड की दूरी बीच में थी। उस समय पसीना छूट गया था लेकिन अपनी नौकरी की गाइड लाइन के अनुसार वहां डटी रही। गनीमत रही कि टाइगर ने अटैक नहीं किया और सीधा निकल गया। चौधरी ने कहा- एक बार तो लगा था कि जान नहीं बचेगी। वह कहती हैं- अब यह उनकी रूटीन की नौकरी हो चुकी है। उस दिन घर पर फोन कर कहा था कि आज जान बच गई। टाइगर अटैक कर देता तो केाई नहीं बचा सकता था। अब जंगल में पैदल भी चलते हैं। टाइगर के पगमार्क भी लेते हैं। उनके पास वॉकी-टॉकी पर बराबर मैसेज भी आते हैं। अटैकिंग मूड में था टाइगर रेखा कहती- एक बार एसटी 18 टाइगर उनकी गाड़ी से कुछ ही दूरी पर आ गया था। उस दिन हम अंधेरी में थे, जो बालकिला के नीचे का सघन जंगल है। उस दिन टाइगर अटैकिंग मूड में था। टाइगर के पास अचानक गाड़ी आई तो वह हमारी तरफ आया लेकिन कुछ दूरी पर रुक गया। अब हम टाइगर की ट्रैकिंग भी खूब करते हैं। बच्चे घर पर पूछते हैं कि टाइगर आता है तो क्या करते हैं। जब हमने बच्चों को बताया कि टाइगर आता है तो हम चुपचाप खड़े हो जाते हैं। तब वह हमला नहीं करता है। 150 मीटर टाइगर आ गया था
ये महिला ट्रैकर ललिता मीना है। उनका कहना है कि हम ट्रैकिंग व पेट्रोलिंग दोनों करते हैं। ट्रैकिंग के समय थोड़ा जंगल में पैदल जाना पड़ता है। एक बार देवरा में टाइगर देखा था। टाइगर उस समय 150 मीटर दूर था लेकिन हम गाड़ी में थे इसलिए ज्यादा घबराहट नहीं हुई। असल में टाइगर के हमला करने का डर तो रहता है। अब घरवाले पहले तो नौकरी को कठिन मानते थे। लेकिन अब सब रूटीन का काम हो गया है। आसानी से करते हैं। रचना से 100 मीटर दूर से 2 लेपर्ड निकले ये रचना फॉरेस्ट गार्ड हैं। एक दिन एक साथ दो लेपर्ड प्रतापबंध चौकी के पास केवल 100 मीटर दूरी से निकले। इसके अलावा 50 मीटर दूरी पर नाके पर टाइगर को देखा था। टाइगर को देखकर एक बार तो घबरा गए थे लेकिन अब ड्यूटी करते समय सामान्य हो गया है। पहली बार देखने पर घबराहट अधिक होती है। अब लगातार जंगल में आ रहे तो सब सामान्य हो गया है। अब ये जानिए ये कैसे करती हैं टाइगर की ट्रैकिंग हमने सीमा चौधरी, रचना, रेखा को जंगल में एक साथ टाइगर की ट्रैकिंग करते देखा। सीमा की वॉकीटॉकी पर आवाज आती है टाइगर ST-18 की लोकेशन बाला किला के पास है। उस समय सीमा बाला किला पास ही ट्रैकिंग कर रही थी। तब टाइगर के पगमार्क चिह्नित करने में लगी थी। यह जानने के बाद वह घबराई नहीं। तुरंत जो पगमार्क वहां देखे। उनकी फोटो ली। उस फोटो को ट्रैकिंग वाले एप पर अपलोड कर दी। उससे सम्बंधित जानकारी भी अपलोड कर दी। जिससे एप के जरिए अफसरों को पता चल गया कि टाइगर एसटी 18 की आसपास में लोकेशन है। इसी तरह अन्य महिला ट्रैकर ऐसे ही रोजाना जंगल में घूमती है। उनका सबका अपना अपना क्षेत्र हैं। जिसमें वे घूमती हैं। इसके अलावा पेट्रोलिंग भी बराबर करती हैं। कहीं से अचानक जंगली जानवर के आने की सूचना आती है तो तुरंत मौके पर भी पहुंचती है। सांभर के बिछुड़े व घायल बच्चों को 2 महीने पाला सीमा चौधरी ने बताया कि सांभर के छोटे बच्चे मां से बिछुड़ गए थे। उनको दो महीने प्रतापबंध पर रखा। जिनको बच्चे की तरह बोतल से दूध पिलाया गया। थोड़ा बहुत बच्चों की तरह खिलाते थे। वे हमें पहचानने लग गए थे। हम उनका पूरा ध्यान रखते थे। जैसे बच्चा दूध को देखकर भागता है। वैसे ही वो आता था। नीरज ने बताया कि एक बार सांभर के बच्चे का पैर टूट गया था। तब उसका पूरा ध्यान रखा। उस समय हमने करीब 6 महीने ध्यान से रखा था। इस कारण लगाव हो जाता है।

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